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Murari Mandal
log ik din ye kah rahe honge
log ik din ye kah rahe honge | लोग इक दिन ये कह रहे होंगे
- Murari Mandal
लोग
इक
दिन
ये
कह
रहे
होंगे
कल
ही
देखा
था
कल
तो
अच्छा
था
- Murari Mandal
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हम
लोग
चूंकि
दश्त
के
पाले
हुए
हैं
सो
ख़्वाबों
में
चाहे
झील
हों,
आँखों
में
पेड़
हैं
Siddharth Saaz
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इसी
लिए
तो
यहाँ
अब
भी
अजनबी
हूँ
मैं
तमाम
लोग
फ़रिश्ते
हैं
आदमी
हूँ
मैं
Bashir Badr
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तलब
करें
तो
ये
आँखें
भी
इन
को
दे
दूँ
मैं
मगर
ये
लोग
इन
आँखों
के
ख़्वाब
माँगते
हैं
Abbas rizvi
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बस-कि
दुश्वार
है
हर
काम
का
आसाँ
होना
आदमी
को
भी
मुयस्सर
नहीं
इंसाँ
होना
Mirza Ghalib
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जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
Nasir Kazmi
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शरीफ़
इंसान
आख़िर
क्यूँ
इलेक्शन
हार
जाता
है
किताबों
में
तो
ये
लिक्खा
था
रावन
हार
जाता
है
Munawwar Rana
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रफ़्ता
रफ़्ता
सब
कुछ
समझ
गया
हूँ
मैं
लोग
अचानक
टैरेस
से
क्यूँ
कूद
गए
Shadab Asghar
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आप
की
सादा-दिली
से
तंग
आ
जाता
हूँ
मैं
मेरे
दिल
में
रह
चुके
हैं
इस
क़दर
हुश्यार
लोग
Nomaan Shauque
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सब
की
हिम्मत
नहीं
ज़माने
में
लोग
डरते
हैं
मुस्कुराने
में
एक
लम्हा
भी
ख़र्च
होता
नहीं
मेरी
ख़ुशियों
को
आने
जाने
में
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Vishal Singh Tabish
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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वो
दिसंबर
याद
आता
है
मुझे
अब
जब
तुम्हारा
हाथ
मेरे
हाथ
में
था
Murari Mandal
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आप
ने
ये
सोच
रक्खा
था
कि
मेरा
और
कोई
भी
नहीं
होगा
कभी
अब
Murari Mandal
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इक
परी
ने
ही
दिया
है
ये
हुनर
भी
अब
विरह
के
गीत
जो
मैं
गा
रहा
हूँ
Murari Mandal
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अगर
तुम
ग़ौर
से
देखो
तो
तुमको
मेरी
मुस्कान
में
दद्दू
दिखेंगे
Murari Mandal
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किसी
आहट
से
दहला
है
मिरा
मन
कि
बस
इतना
ही
छोटा
है
मिरा
मन
मेरे
हुजरे
में
तन्हाई
पड़ी
है
मेरी
चौखट
पे
सोता
है
मिरा
मन
ग़लत
हो
बात
फिर
भी
मानता
है
कोई
ऐसे
भी
रखता
है
मिरा
मन
ख़ुशी
मिलती
थी
जिस
सेे
मिल
के
कल
तक
उसे
अब
मिल
के
रोता
है
मिरा
मन
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Murari Mandal
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