daastaan-e-muntazir | "दास्ताँ-ए-मुन्तज़िर"

  - Muntazir Firozabadi
"दास्ताँ-ए-मुन्तज़िर"
गरसुननीहैतोफिरएककहानीसुनो
मुन्तज़िरकीआँखोंमेंहैपानीसुनो
मुन्तज़िरकिसीसेभीडरतानहींथा
यायूँँकहोकोईउसपेमरतानहींथा
मुन्तज़िरकीतालीमतोअच्छीरहीथी
मगरउसकीकिस्मतहीकच्चीरहीथी
मुन्तज़िरनेदिएजलायेबहुतथे
मुन्तज़िरकेज़ेहनमेंसाएबहुतथे
मगरअबयेआलमअँधेराअँधेरा
हाएमेरेयारोंकबहोगासवेरा
मुन्तज़िरकादर्दमुन्तज़िरकानहींहै
सुनाहैमुन्तज़िरयहींहैंकहींहै
गिरगईमुन्तज़िरकीहवाईहवेली
मुन्तज़िरकीदाढ़ीमेंहोगईसफेदी
मुन्तज़िरकीराहमेंरोड़ेबहुतहैं
मुन्तज़िरकोकामथोड़ेबहुतहैं
मुन्तज़िरकोकोईअबफटकारतानहींहै
फटकारताहैगरतोदुत्कारतानहींहै
सुनाहैमुन्तज़िरअबदिखतानहींहै
मुन्तज़िरबाज़ारोंमेंबिकतानहींहै
काशकिमुन्तज़िरबाज़ारोंमेंबिकता
फिरएकदोमेंनहींहज़ारोंमेंबिकता
मुन्तज़िरकोकोईहज़ारीतोमिलती
फिरचाहेंज़िगरपेआरीहीचलती
मुन्तज़िरकीबाँहोंमेंआईतोहोती
उसनेभीएकदुनियापाईतोहोती
शाम-ए-मुन्तज़िरकोसुबामिलजाए
गरआपलोगोंकीदु'आमिलजाए
  - Muntazir Firozabadi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy