teri nigaah-e-naaz ke bismil na honge ham | तेरी निगाह-ए-नाज़ के बिस्मिल न होंगे हम

  - Muntazir Firozabadi
तेरीनिगाह-ए-नाज़केबिस्मिलहोंगेहम
हररंगहरफ़ज़ामेंतोशामिलहोंगेहम
इकबे-वफ़ासेहमनेयहाँतककहाकभी
चाहेगागरख़ुदाभीतोहासिलहोंगेहम
तन्क़ीदकरनेवालोंपेहँसनापड़ाहमें
मुश्किलवोचाहतेहमेंमुश्किलहोंगेहम
साहिलपेजानेवालेकभीलौटतेनहीं
धोकेसेभीकभीकोईसाहिलहोंगेहम
हमकोहैइश्क़उससेजोहैजौन-एलिया
यानीकिआपकेकोईक़ाबिलहोंगेहम
हमनेतोअपनेजिस्ममेंइकदिलकोमाराहै
क्याफिरभीसोचतेहोकिक़ातिलहोंगेहम
मानाशराबपीतेहैंतोक्याहुआमियाँ
यानीकिआपकहतेहैंफ़ाज़िलहोंगेहम
  - Muntazir Firozabadi
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