khumaar-e-mausam-e-khushbu had-e-chaman men khula | ख़ुमार-ए-मौसम-ए-ख़ुश्बू हद-ए-चमन में खुला

  - Mohsin Naqvi
ख़ुमार-ए-मौसम-ए-ख़ुश्बूहद-ए-चमनमेंखुला
मिरीग़ज़लकाख़ज़ानातिरेबदनमेंखुला
तुमउसकाहुस्नकभीउसकीबज़्ममेंदेखो
किमाहताबसदाशबकेपैरहनमेंखुला
अजबनशाथामगरउसकीबख़्शिश-ए-लबमें
कियूँँतोहमसेभीक्याक्यावोसुख़नमेंखुला
पूछपहलीमुलाक़ातमेंमिज़ाजउसका
वोरंगरंगमेंसिमटाकिरनकिरनमेंखुला
बदनकीचापनिगहकीज़बाँभीहोतीहै
येभेदहमपेमगरउसकीअंजुमनमेंखुला
किजैसेअब्रहवाकीगिरहसेखुलजाए
सफ़रकीशाममिरामेहरबाँथकनमेंखुला
कहूँमैंकिससेनिशानीथीकिसमसीहाकी
वोएकज़ख़्मकि'मोहसिन'मिरेकफ़नमेंखुला
  - Mohsin Naqvi
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