azaab-e-deed men aañkhen lahu lahu kar ke | अज़ाब-ए-दीद में आँखें लहू लहू कर के

  - Mohsin Naqvi
अज़ाब-ए-दीदमेंआँखेंलहूलहूकरके
मैंशर्मसारहुआतेरीजुस्तुजूकरके
खंडरकीतहसेबुरीदा-बदनसरोंकेसिवा
मिलाकुछभीख़ज़ानोंकीआरज़ूकरके
सुनाहैशहरमेंज़ख़्मीदिलोंकामेलाहै
चलेंगेहमभीमगरपैरहनरफ़ूकरके
मसाफ़त-ए-शब-ए-हिज्राँकेबा'दभेदखुला
हवादुखीहैचराग़ोंकीआबरूकरके
ज़मींकीप्यासउसीकेलहूकोचाटगई
वोख़ुशहुआथासमुंदरकोआबजूकरके
येकिसनेहमसेलहूकाख़िराजफिरमाँगा
अभीतोसोएथेमक़्तलकोसुर्ख़-रूकरके
जुलूस-ए-अहल-ए-वफ़ाकिसकेदरपेपहुँचाहै
निशान-ए-तौक़-ए-वफ़ाज़ीनत-ए-गुलूकरके
उजाड़रुतकोगुलाबीबनाएरखतीहै
हमारीआँखतिरीदीदसेवुज़ूकरके
कोईतोहब्स-ए-हवासेयेपूछता'मोहसिन'
मिलाहैक्याउसेकलियोंकोबे-नुमूकरके
  - Mohsin Naqvi
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