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Ankur Mishra
zaKHm se bahta hai rakt par
zaKHm se bahta hai rakt par | ज़ख़्म से बहता है रक्त पर
- Ankur Mishra
ज़ख़्म
से
बहता
है
रक्त
पर
आँख
भरने
नहीं
देते
हैं
उस
की
ज़द
में
है
घर
मेरा
पर
आग
बुझने
नहीं
देते
हैं
- Ankur Mishra
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बहुत
उदास
था
उस
दिन
मगर
हुआ
क्या
था
हर
एक
बात
भली
थी
तो
फिर
बुरा
क्या
था
Javed Nasir
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जी
नहीं
भरता
कभी
इक
बार
में
इश्क़
हम
ने
भी
दोबारा
कर
लिया
shaan manral
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फिर
बालों
में
रात
हुई
फिर
हाथों
में
चाँद
खिला
Adil Mansuri
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बड़े
लोगों
से
मिलने
में
हमेशा
फ़ासला
रखना
जहाँ
दरिया
समुंदर
से
मिला
दरिया
नहीं
रहता
Bashir Badr
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मैं
ज़िंदगी
के
सभी
ग़म
भुलाए
बैठा
हूँ
तुम्हारे
इश्क़
से
कितनी
मुझे
सहूलत
है
Zeeshan Sahil
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तुम्हें
हरगिज़
ग़लत
समझे
न
कोई
रुको
मैं
बे-वफ़ाई
कर
रहा
हूँ
Shadab Javed
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मिला
है
दुख
सदा
मुझको
मेरा
दुख
से
ये
नाता
है
मिरे
ख़ुद
घाव
में
मरहम
लगा
कर
दुख
सुलाता
है
Tiwari Jitendra
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रास्ते
में
फिर
वही
पैरों
का
चक्कर
आ
गया
जनवरी
गुज़रा
नहीं
था
और
दिसंबर
आ
गया
Rahat Indori
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सोचूँ
तो
सारी
उम्र
मोहब्बत
में
कट
गई
देखूँ
तो
एक
शख़्स
भी
मेरा
नहीं
हुआ
Jaun Elia
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बाक़ी
न
दिल
में
कोई
भी
या
रब
हवस
रहे
चौदह
बरस
के
सिन
में
वो
लाखों
बरस
रहे
Ameer Minai
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जो
था
जितना
था
तुझी
से
था
शोर
कितना
ख़ामुशी
से
था
रखता
कैसे
वो
निशानी
मैं
और
इक
वा'दा
किसी
से
था
ढूँढ़
लेगा
वो
पता
मेरा
रिश्ता
जिसका
बेख़ुदी
से
था
ज़िक्र
अब
भी
होता
है
उसका
दूर
जो
अपनी
ख़ुशी
से
था
इक
मैं
ही
तन्हा
नहीं
'अंकुर'
तंग
वो
भी
ज़िंदगी
से
था
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Ankur Mishra
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पहले
से
भी
गहरा
हुआ
वो
दरिया
जो
सहरा
हुआ
जाने
कहाँ
तक
जाएगा
ये
रास्ता
ठहरा
हुआ
कुछ
भी
नहीं
है
पास
फिर
क्यूँ
मुझ
पे
ये
पहरा
हुआ
सुन
ख़ामुशी
लफ़्ज़ों
की
इन
दुश्मन
मिरा
बहरा
हुआ
कब
जाने
आएगा
वो
फिर
है
मुझ
में
जो
ठहरा
हुआ
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Ankur Mishra
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घूम
कर
आना
था
सो
हम
आ
गए
उस
गली
की
ख़ाक
को
हम
भा
गए
सोच
रक्खा
था
रखेंगे
फ़ासला
पर
नज़र
में
ज़ख़्म
जो
थे
आ
गए
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Ankur Mishra
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छाँव
सहरा
की
शजर
को
ढूँढती
है
धूप
घर
को
किस
तरह
करता
जुदा
मैं
आइने
से
उस
नज़र
को
चूम
लेती
हैं
निगाहें
जब
निगाहों
से
नज़र
को
अब
तलक
भूले
नहीं
हैं
ये
क़दम
उस
रह-गुज़र
को
रात
रखती
है
जगाए
ऐ
मुसाफ़िर
इस
सहर
को
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Ankur Mishra
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दर-ब-दर
बेज़ार
सा
था
ख़ाली
मैं
इतवार
सा
था
भर
गए
थे
ज़ख़्म
लेकिन
फिर
भी
मैं
बीमार
सा
था
जाने
किसकी
थी
ये
साज़िश
कौन
वो
अय्यार
सा
था
पास
सब
था
मेरे
पर
मैं
लगता
क्यूँ
अशरार
सा
था
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Ankur Mishra
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