ye na thii hamaari qismat ki visaal-e-yaar hota | ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता

  - Mirza Ghalib
येथीहमारीक़िस्मतकिविसाल-ए-यारहोता
अगरऔरजीतेरहतेयहीइंतिज़ारहोता
तिरेवा'देपरजिएहमतोयेजानझूटजाना
किख़ुशीसेमरजातेअगरए'तिबारहोता
तिरीनाज़ुकीसेजानाकिबँधाथाअहदबोदा
कभीतूतोड़सकताअगरउस्तुवारहोता
कोईमेरेदिलसेपूछेतिरेतीर-ए-नीम-कशको
येख़लिशकहाँसेहोतीजोजिगरकेपारहोता
येकहाँकीदोस्तीहैकिबनेहैंदोस्तनासेह
कोईचारासाज़होताकोईग़म-गुसारहोता
रग-ए-संगसेटपकतावोलहूकिफिरथमता
जिसेग़मसमझरहेहोयेअगरशरारहोता
ग़मअगरचेजाँ-गुसिलहैकहाँबचेंकिदिलहै
ग़म-ए-इश्क़गरहोताग़म-ए-रोज़गारहोता
कहूँकिससेमैंकिक्याहैशब-ए-ग़मबुरीबलाहै
मुझेक्याबुराथामरनाअगरएकबारहोता
हुएमरकेहमजोरुस्वाहुएक्यूँँग़र्क़-ए-दरिया
कभीजनाज़ाउठताकहींमज़ारहोता
उसेकौनदेखसकताकियगानाहैवोयकता
जोदुईकीबूभीहोतीतोकहींदो-चारहोता
येमसाईल-ए-तसव्वुफ़येतिराबयान'ग़ालिब'
तुझेहमवलीसमझतेजोबादा-ख़्वारहोता
  - Mirza Ghalib
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