kabhi neki bhi us ke jee men gar aa jaa.e hai mujh se | कभी नेकी भी उस के जी में गर आ जाए है मुझ से

  - Mirza Ghalib
कभीनेकीभीउसकेजीमेंगरजाएहैमुझसे
जफ़ाएँकरकेअपनीयादशरमाजाएहैमुझसे
ख़ुदायाजज़्बा-ए-दिलकीमगरतासीरउल्टीहै
किजितनाखींचताहूँऔरखिंचताजाएहैमुझसे
वोबद-ख़ूऔरमेरीदास्तान-ए-इश्क़तूलानी
इबारतमुख़्तसरक़ासिदभीघबराजाएहैमुझसे
उधरवोबद-गुमानीहैइधरयेना-तवानीहै
पूछाजाएहैउससेबोलाजाएहैमुझसे
सँभलनेदेमुझेना-उम्मीदीक्याक़यामतहै
किदामान-ए-ख़याल-ए-यारछूटाजाएहैमुझसे
तकल्लुफ़बरतरफ़नज़्ज़ारगीमेंभीसहीलेकिन
वोदेखाजाएकबयेज़ुल्मदेखाजाएहैमुझसे
हुएहैंपाँवहीपहलेनबर्द-ए-इश्क़मेंज़ख़्मी
भागाजाएहैमुझसेठहराजाएहैमुझसे
क़यामतहैकिहोवेमुद्दईकाहम-सफ़र'ग़ालिब'
वोकाफ़िरजोख़ुदाकोभीसौंपाजाएहैमुझसे
  - Mirza Ghalib
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy