दिलहीतोहैनसंग-ओ-ख़िश्तदर्दसेभरनआएक्यूँँ
रोएँगेहमहज़ारबारकोईहमेंसताएक्यूँँ
दैरनहींहरमनहींदरनहींआस्ताँनहीं
बैठेहैंरहगुज़रपेहमग़ैरहमेंउठाएक्यूँँ
जबवोजमाल-ए-दिल-फ़रोज़सूरत-ए-मेहर-ए-नीमरोज़
आपहीहोनज़्ज़ारा-सोज़पर्देमेंमुँहछुपाएक्यूँँ
दश्ना-ए-ग़म्ज़ाजाँ-सिताँनावक-ए-नाज़बे-पनाह
तेराहीअक्स-ए-रुख़सहीसामनेतेरेआएक्यूँँ
क़ैद-ए-हयातओबंद-ए-ग़मअस्लमेंदोनोंएकहैं
मौतसेपहलेआदमीग़मसेनजातपाएक्यूँँ
हुस्नऔरउसपेहुस्न-ए-ज़नरहगईबुल-हवसकीशर्म
अपनेपेए'तिमादहैग़ैरकोआज़माएक्यूँँ
वाँवोग़ुरूर-ए-इज्ज़-ओ-नाज़याँयेहिजाब-ए-पास-ए-वज़अ
राहमेंहममिलेंकहाँबज़्ममेंवोबुलाएक्यूँँ
हाँवोनहींख़ुदा-परस्तजाओवोबे-वफ़ासही
जिसकोहोदीनओदिलअज़ीज़उसकीगलीमेंजाएक्यूँँ
'ग़ालिब'-ए-ख़स्ताकेबग़ैरकौनसेकामबंदहैं
रोइएज़ारज़ारक्याकीजिएहाएहाएक्यूँँ