tapish se meri waqf-e-kashmakash har taar-e-bistar hai | तपिश से मेरी वक़्फ़-ए-कशमकश हर तार-ए-बिस्तर है

  - Mirza Ghalib
तपिशसेमेरीवक़्फ़-ए-कशमकशहरतार-ए-बिस्तरहै
मिरासररंज-ए-बालींहैमिरातनबार-ए-बिस्तरहै
सरिश्क-ए-सरब-सहरादादानूर-उल-ऐन-ए-दामनहै
दिल-ए-बे-दस्त-ओ-पाउफ़्तादाबर-ख़ुरदार-ए-बिस्तरहै
ख़ुशाइक़बाल-ए-रंजूरीअयादतकोतुमआएहो
फ़रोग-ए-शम-ए-बालींफ़रोग-ए-शाम-ए-बालीँहै
ब-तूफ़ाँ-गाह-ए-जोश-ए-इज़्तिराब-ए-शाम-ए-तन्हाई
शुआ-ए-आफ़्ताब-ए-सुब्ह-ए-महशरतार-ए-बिस्तरहै
अभीआतीहैबूबालिशसेउसकीज़ुल्फ़-ए-मुश्कींकी
हमारीदीदकोख़्वाब-ए-ज़ुलेख़ाआर-ए-बिस्तरहै
कहूँक्यादिलकीक्याहालतहैहिज्र-ए-यारमेंग़ालिब
किबेताबीसेहर-यकतार-ए-बिस्तरख़ार-ए-बिस्तरहै
  - Mirza Ghalib
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