har ek baat pe kahte ho tum ki tu kya hai | हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है

  - Mirza Ghalib
हरएकबातपेकहतेहोतुमकितूक्याहै
तुम्हींकहोकियेअंदाज़-ए-गुफ़्तुगूक्याहै
शो'लेमेंयेकरिश्माबर्क़मेंयेअदा
कोईबताओकिवोशोख़-ए-तुंद-ख़ूक्याहै
येरश्कहैकिवोहोताहैहम-सुख़नतुमसे
वगर्नाख़ौफ़-ए-बद-आमोज़ी-ए-अदूक्याहै
चिपकरहाहैबदनपरलहूसेपैराहन
हमारेजैबकोअबहाजत-ए-रफ़ूक्याहै
जलाहैजिस्मजहाँदिलभीजलगयाहोगा
कुरेदतेहोजोअबराखजुस्तुजूक्याहै
रगोंमेंदौड़तेफिरनेकेहमनहींक़ाइल
जबआँखहीसेटपकातोफिरलहूक्याहै
वोचीज़जिसकेलिएहमकोहोबहिश्तअज़ीज़
सिवाएबादा-ए-गुलफ़ाम-ए-मुश्क-बूक्याहै
पि
यूँँशराबअगरख़ुमभीदेखलूँदो-चार
येशीशाक़दहकूज़ासुबूक्याहै
रहीताक़त-ए-गुफ़्तारऔरअगरहोभी
तोकिसउमीदपेकहिएकिआरज़ूक्याहै
हुआहैशहकामुसाहिबफिरेहैइतराता
वगर्नाशहरमें'ग़ालिब'कीआबरूक्याहै
  - Mirza Ghalib
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