hazaaron khwaahishein aisi ki har KHvaahish pe dam nikle | हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले

  - Mirza Ghalib
हज़ारोंख़्वाहिशेंऐसीकिहरख़्वाहिशपेदमनिकले
बहुतनिकलेमिरेअरमानलेकिनफिरभीकमनिकले
डरेक्यूँँमेराक़ातिलक्यारहेगाउसकीगर्दनपर
वोख़ूँजोचश्म-ए-तरसेउम्रभरयूँँदम-ब-दमनिकले
निकलनाख़ुल्दसेआदमकासुनतेआएहैंलेकिन
बहुतबे-आबरूहोकरतिरेकूचेसेहमनिकले
भरमखुलजाएज़ालिमतेरेक़ामतकीदराज़ीका
अगरइसतुर्रा-ए-पुर-पेच-ओ-ख़मकापेच-ओ-ख़मनिकले
मगरलिखवाएकोईउसकोख़ततोहमसेलिखवाए
हुईसुब्हऔरघरसेकानपररखकरक़लमनिकले
हुईइसदौरमेंमंसूबमुझसेबादा-आशामी
फिरआयावोज़मानाजोजहाँमेंजाम-ए-जमनिकले
हुईजिनसेतवक़्क़ो'ख़स्तगीकीदादपानेकी
वोहमसेभीज़ियादाख़स्ता-ए-तेग़-ए-सितमनिकले
मोहब्बतमेंनहींहैफ़र्क़जीनेऔरमरनेका
उसीकोदेखकरजीतेहैंजिसकाफ़िरपेदमनिकले
कहाँमय-ख़ानेकादरवाज़ा'ग़ालिब'औरकहाँवाइ'ज़
परइतनाजानतेहैंकलवोजाताथाकिहमनिकले
  - Mirza Ghalib
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