deewaangi se dosh pe zunnar bhi nahin | दीवानगी से दोश पे ज़ुन्नार भी नहीं

  - Mirza Ghalib
दीवानगीसेदोशपेज़ुन्नारभीनहीं
या'नीहमारेजेबमेंइकतारभीनहीं
दिलकोनियाज़-ए-हसरत-ए-दीदारकरचुके
देखातोहममेंताक़त-ए-दीदारभीनहीं
मिलनातिराअगरनहींआसाँतोसहलहै
दुश्वारतोयहीहैकिदुश्वारभीनहीं
बे-इश्क़उम्रकटनहींसकतीहैऔरयाँ
ताक़तब-क़दर-ए-लज़्ज़त-ए-आज़ारभीनहीं
शोरीदगीकेहाथसेहैसरवबाल-ए-दोश
सहरामेंख़ुदाकोईदीवारभीनहीं
गुंजाइश-ए-अदावत-ए-अग़्यारयकतरफ़
याँदिलमेंज़ोफ़सेहवस-ए-यारभीनहीं
डरनाला-हा-ए-ज़ारसेमेरेख़ुदाकोमान
आख़िरनवा-ए-मुर्ग़-ए-गिरफ़्तारभीनहीं
दिलमेंहैयारकीसफ़-ए-मिज़्गाँसेरू-कशी
हालाँकिताक़त-ए-ख़लिश-ए-ख़ारभीनहीं
इससादगीपेकौनमरजाएख़ुदा
लड़तेहैंऔरहाथमेंतलवारभीनहीं
देखा'असद'कोख़ल्वत-ओ-जल्वतमेंबार-हा
दीवानागरनहींहैतोहुश्यारभीनहीं
  - Mirza Ghalib
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