naaz-e-chaman vahii hai bulbul se go khizaan hai | नाज़-ए-चमन वही है बुलबुल से गो ख़िज़ाँ है

  - Meer Taqi Meer
नाज़-ए-चमनवहीहैबुलबुलसेगोख़िज़ाँहै
टहनीजोज़र्दभीहैसोशाख़-ए-ज़ाफ़राँहै
गरइसचमनमेंवोभीइकहीलब-ओ-दहाँहै
लेकिनसुख़नकातुझसेग़ुंचेकोमुँहकहाँहै
हंगाम-ए-जल्वाउसकेमुश्किलहैठहरेरहना
चितवनहैदिलकीआफ़त-ए-चश्मकबला-ए-जाँहै
पत्थरसेतोड़नेकेक़ाबिलहैआरसीतू
परक्याकरेंकिप्यारेमुँहतेरादरमियाँहै
बाग़-ओ-बहारहैवोमैंकिश्त-ए-ज़ाफ़राँहूँ
जोलुत्फ़इकइधरहैतोयाँभीइकसमाँहै
हर-चंदज़ब्तकरिएछुपताहैइश्क़कोई
गुज़रेहैदिलपेजोकुछचेहरेहीसेअयाँहै
इसफ़नमेंकोईबे-तहक्याहोमिरामुआरिज़
अव्वलतोमैंसनदहूँफिरयेमिरीज़बाँहै
आलममेंआब-ओ-गिलकाठहरावकिसतरहहो
गरख़ाकहैअड़ेहैवरआबहैरवाँहै
चर्चारहेगाउसकाता-हश्रमय-कशाँमें
ख़ूँ-रेज़ीकीहमारीरंगीनदास्ताँहै
अज़-ख़वीशरफ़्ताउसबिनरहताहै'मीर'अक्सर
रहतेहोबातकिससेवोआपमेंकहाँहै
  - Meer Taqi Meer
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