raftaar-o-taur-o-tarz-o-ravish ka ye dhab hai kya | रफ़्तार-ओ-तौर-ओ-तर्ज़-ओ-रविश का ये ढब है क्या

  - Meer Taqi Meer
रफ़्तार-ओ-तौर-ओ-तर्ज़-ओ-रविशकायेढबहैक्या
पहलेसुलूकऐसेहीतेरेथेअबहैक्या
हमदिल-ज़दारखतेथेतुमसेयेचश्म-दाश्त
करतेहोक़हरलुत्फ़कीजागाग़ज़बहैक्या
इज़्ज़तभीबा'दज़िल्लतबिसयारछेड़है
मज्लिसमेंजबख़फ़ीफ़कियाफिरअदबहैक्या
आएहमआपमेंतोपहचानेफिरगए
उसराह-ए-साबइश्क़मेंयारोतअबहैक्या
हैराँहैंउसदहनकेअज़ीज़ान-ए-ख़ुर्दा-बीं
येभीमक़ामहाएतअम्मुलतलबहैक्या
आँखेंजोहोवेंतेरीतोतूऐनकररखे
आलमतमामगरवोनहींतोयेसबहैक्या
उसआफ़्ताबबिननहींकुछसूझताहमें
गरयेहीअपनेदिनहैंतोतारीकशबहैक्या
तुमनेहमेशाजौर-ओ-सितमबे-सबबकिए
अपनाहीज़र्फ़थाजोपूछासबबहैक्या
क्यूँँकरतुम्हारीबातकरेकोईए'तिबार
ज़ाहिरमेंक्याकहोहोसुख़नज़ेर-ए-लबहैक्या
उसमहबग़ैर'मीर'कामरनाअजबहुआ
हर-चंदमर्ग-ए-आशिक़मिस्कींअजबहैक्या
  - Meer Taqi Meer
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