mohabbat ka jab roz bazaar hogaa | मोहब्बत का जब रोज़ बाज़ार होगा

  - Meer Taqi Meer
मोहब्बतकाजबरोज़बाज़ारहोगा
बिकेंगेसरऔरकमख़रीदारहोगा
तसल्लीहुआसब्रसेकुछमैंतुझबिन
कभीयेक़यामततरहदारहोगा
सबामू-ए-ज़ुल्फ़उसकाटूटेतोडरहै
किइकवक़्तमेंयेसियह-मारहोगा
मिरादाँतहैतेरेहोंटोंपेमतपूछ
कहूँगातोलड़नेकोतय्यारहोगा
ख़ालीरहेगीमिरीजागहगरमैं
हूँगातोअंदोहबिसयारहोगा
येमंसूरकाख़ून-ए-नाहक़किहक़था
क़यामतकोकिसकिससेख़ूँदारहोगा
अजबशैख़-जीकीहैशक्ल-ओ-शमाइल
मिलेगातोसूरतसेबेज़ारहोगा
रोइश्क़मेंदश्त-गर्दीकोमजनूँ
अभीक्याहुआहैबहुतख़्वारहोगा
खिंचेअहद-ए-ख़तमेंभीदिलतेरीजानिब
कभूतोक़यामततरहदारहोगा
ज़मींगीरहोइज्ज़सेतूकिइकदिन
येदीवारकासायादीवारहोगा
मरकरभीछूटेगाइतनारुकेगा
तिरेदाममेंजोगिरफ़्तारहोगा
पूछअपनीमज्लिसमेंहै'मीर'भीयाँ
जोहोगातोजैसेगुनहगारहोगा
  - Meer Taqi Meer
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