zabaan rakh guncha saan apne dehan men | ज़बाँ रख ग़ुंचा साँ अपने दहन में

  - Meer Taqi Meer
ज़बाँरखग़ुंचासाँअपनेदहनमें
बंधीमुट्ठीचलाजाइसचमनमें
खोलयारमेरागोरमेंमुँह
किहसरतहैमिरीजागाकफ़नमें
रखाकरहाथदिलपरआहकरते
नहींरहताचराग़ऐसीपवनमें
जलेदिलकीमुसीबतअपनेसुनकर
लगीहैआगसारेतनबदनमें
तुझबिनहोशमेंहमआएसाक़ी
मुसाफ़िरहीरहेअक्सरवतनमें
ख़िरद-मंदीहुईज़ंजीरवर्ना
गुज़रतीख़ूबथीदीवाना-पनमें
कहाँकेशम-ओ-परवानेगएमर
बहुतआतश-बजाँथेइसचमनमें
कहाँआजिज़-सुख़नक़ादिर-सुख़नहूँ
हमेंहैशुबहयारोंकेसुख़नमें
गुदाज़इश्क़मेंभीगया'मीर'
यहीधोकासाहैअबपैरहनमें
  - Meer Taqi Meer
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