kya karoon sharh khasta-jaani ki | क्या करूँँ शरह ख़स्ता-जानी की

  - Meer Taqi Meer
क्याकरूँँशरहख़स्ता-जानीकी
मैंनेमरमरकेज़िंदगानीकी
हाल-ए-बदगुफ़्तनीनहींमेरा
तुमनेपूछातोमेहरबानीकी
सबकोजानाहैयूँँतोपरसब्र
आतीहैइकतिरीजवानीकी
तिश्ना-लबमरगएतिरे'आशिक़
मिलीएकबूँदपानीकी
बैत-बहसीसमझकेकरबुलबुल
धूमहैमेरीख़ुश-ज़बानीकी
जिससेखोईथीनींद'मीर'नेकल
इब्तिदाफिरवहीकहानीकी
  - Meer Taqi Meer
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy