kis shaam se utha tha mire dil men dard sa | किस शाम से उठा था मिरे दिल में दर्द सा

  - Meer Taqi Meer
किसशामसेउठाथामिरेदिलमेंदर्दसा
सोहोचलाहूँपेशतर-अज़-सुब्हसर्दसा
बैठाहूँजूँग़ुबार-ए-ज़ईफ़अबवगर्नामें
फिरतारहाहूँगलियोंमेंआवारा-गर्दसा
क़स्द-ए-तरीक़-ए-इश्क़कियासबनेबा'द-ए-क़ैस
लेकिनहुआएकभीउसरह-नवर्दसा
हाज़िरयराक़-ए-बे-मज़गीकिसघड़ीनहीं
मा'शूक़कुछहमाराहैआशिक़-नबर्दसा
क्या'मीर'हैयहीजोतिरेदरपेथाखड़ा
नमनाक-चश्म-ओ-ख़ुश्क-लबरंगज़र्दसा
  - Meer Taqi Meer
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