kya kahein aatish-e-hijraan se gale jaate hain | क्या कहें आतिश-ए-हिज्राँ से गले जाते हैं

  - Meer Taqi Meer
क्याकहेंआतिश-ए-हिज्राँसेगलेजातेहैं
छातियाँसुलगेंहैंऐसीकिजलेजातेहैं
गौहर-ए-गोशकिसूकानहींजीसेजाता
आँसूमोतीसेमिरेमुँहपेढलेजातेहैं
यहीमसदूदहैकुछराह-ए-वफ़ावर्नाबहम
सबकहींनामापैग़ामचलेजातेहैं
बार-ए-हिरमान-ओ-गुल-ओ-दाग़नहींअपनेसाथ
शजर-ए-बाग़-ए-वफ़ाफूलेफलेजातेहैं
हैरत-ए-इश्क़मेंतस्वीरसेरफ़्ताहीरहे
ऐसेजातेहैंजोहमभीतोभलेजातेहैं
हिज्रकीकोफ़्तजोखींचेहैंउन्हींसेपूछो
दिलदिएजातेहैंजीअपनेमलेजातेहैं
याद-ए-क़दमेंतिरेआँखोंसेबहेंहैंजुएँ
गरकिसूबाग़मेंहमसर्वतलेजातेहैं
देखेंपेशआवेहैक्याइश्क़मेंअबतोजूँसैल
हमभीइसराहमेंसरगाड़ेचलेजातेहैं
पुर-ग़ुबारी-ए-जहाँसेनहींसुध'मीर'हमें
गर्दइतनीहैकिमिट्टीमेंरुलेजातेहैं
  - Meer Taqi Meer
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy