kar naala-kashi kab tai auqaat guzaaren | कर नाला-कशी कब तईं औक़ात गुज़ारें

  - Meer Taqi Meer
करनाला-कशीकबतईंऔक़ातगुज़ारें
फ़रियादकरेंकिससेकहाँजाकेपुकारें
हर-दमकाबिगड़नातोकुछअबछूटाहैइनसे
शायदकिसीनाकामकाभीकामसँवारें
दिलमेंजोकभूजोश-ए-ग़मउठताहैतोता-देर
आँखोंसेचलीजातीहैंदरियाकीसीधारें
क्याज़ुल्महैउसख़ूनी-ए-आलमकीगलीमें
जबहमगएदो-चारनईदेखेंमज़ारें
जिसजाकिख़स-ओ-ख़ारकेअबढेरलगेहैं
याँहमनेउन्हेंआँखोंसेदेखेंहैंबहारें
क्यूँँकरकेरहेशरममिरीशहरमेंजबआह
नामूसकहाँउतरेंजोदरियापेइज़ारें
वेहोंटकिहैशोर-ए-मसीहाईकाजिनकी
दमलेवेंदो-चारकोताजीसेमारें
मंज़ूरहैकबसेसर-ए-शोरीदाकादेना
चढ़जाएनज़रकोईतोयेबोझउतारें
बालींपेसरइकउम्रसेहैदस्त-ए-तलबका
जोहैसोगदाकिसकनेजाहाथपसारें
उनलोगोंकेतोगर्दफिरसबहैंलिबासी
सौगज़भीजोयेफाड़ेंतोइकगज़भीवारें
नाचारहोरुख़्सतजोमँगाभेजीतोबोला
मैंक्याकरूँँजो'मीर'-जीजातेहैंसुधारें
  - Meer Taqi Meer
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