hasti apni habaab ki si hai | हस्ती अपनी हबाब की सी है

  - Meer Taqi Meer
हस्तीअपनीहबाबकीसीहै
येनुमाइशसराबकीसीहै
नाज़ुकीउसकेलबकीक्याकहिए
पंखुड़ीइकगुलाबकीसीहै
चश्म-ए-दिलखोलइसभीआलमपर
याँकीऔक़ातख़्वाबकीसीहै
बारबारउसकेदरपेजाताहूँ
हालतअबइज़्तिराबकीसीहै
नुक़्ता-ए-ख़ालसेतिराअबरू
बैतइकइंतिख़ाबकीसीहै
मैंजोबोलाकहाकियेआवाज़
उसीख़ाना-ख़राबकीसीहै
आतिश-ए-ग़ममेंदिलभुनाशायद
देरसेबूकबाबकीसीहै
देखिएअब्रकीतरहअबके
मेरीचश्म-ए-पुर-आबकीसीहै
'मीर'उननीम-बाज़आँखोंमें
सारीमस्तीशराबकीसी
  - Meer Taqi Meer
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy