gham raha jab tak ki dam men dam raha | ग़म रहा जब तक कि दम में दम रहा

  - Meer Taqi Meer
ग़मरहाजबतककिदममेंदमरहा
दिलकेजानेकानिहायतग़मरहा
हुस्नथातेराबहुतआलम-फ़रेब
ख़तकेआनेपरभीइकआलमरहा
दिलपहुँचागोशा-ए-दामाँतलक
क़तरा-ए-ख़ूँथामिज़ापरजमरहा
सुनतेहैंलैलाकेख़े
मेंकोसियाह
उसमेंमजनूँकामगरमातमरहा
जामा-ए-एहराम-ए-ज़ाहिदपरजा
थाहरममेंलेकना-महरमरहा
ज़ुल्फ़ेंखोलींतोतूटुकआयानज़र
उम्रभरयाँकाम-ए-दिलबरहमरहा
उसकेलबसेतल्ख़हमसुनतेरहे
अपनेहक़मेंआब-ए-हैवाँसमरहा
मेरेरोनेकीहक़ीक़तजिसमेंथी
एकमुद्दततकवोकाग़ज़नमरहा
सुब्ह-ए-पीरीशामहोनेआई'मीर'
तूचेतायाँबहुतदिनकमरहा
  - Meer Taqi Meer
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