mat ho maghroor ai ki tujh men zor hai | मत हो मग़रूर ऐ कि तुझ में ज़ोर है

  - Meer Taqi Meer
मतहोमग़रूरकितुझमेंज़ोरहै
याँसुलैमाँकेमुक़ाबिलमोरहै
मरगएपरभीहैसौलतफ़क़्रकी
चश्म-ए-शीरअपनाचराग़-ए-गोरहै
जबसेकाग़ज़-बादकाहैशौक़उसे
एकआलमउसकेऊपरडोरहै
रहनुमाईशैख़सेमतचश्मरख
वाएवोजिसकाअसाकश-कोरहै
लेहीजातीहैज़र-ए-गुलकोउड़ा
सुब्हकीभीबाव-बादीचोरहै
दिलखिंचेजातेहैंसारेउसतरफ़
क्यूँँकेकहिएहक़हमारीओरहै
थाबलाहंगामा-आरा'मीर'भी
अबतलकगलियोंमेंउसकाशोरहै
  - Meer Taqi Meer
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