ab jo ik hasrat-e-jawaani hai | अब जो इक हसरत-ए-जवानी है

  - Meer Taqi Meer
अबजोइकहसरत-ए-जवानीहै
उम्र-ए-रफ़्ताकीयेनिशानीहै
रश्क-ए-यूसुफ़हैआहवक़्त-ए-अज़ीज़
उम्रइकबार-ए-कारवानीहै
गिर्याहरवक़्तकानहींबे-हेच
दिलमेंकोईग़म-ए-निहानीहै
हमक़फ़स-ज़ादक़ैदीहैंवर्ना
ताचमनएकपर-फ़िशानीहै
उसकीशमशीरतेज़हैहमदम
मररहेंगेजोज़िंदगानीहै
ग़म-ओ-रंज-ओ-अलमनिकोयाँसे
सबतुम्हारीहीमेहरबानीहै
ख़ाकथीमौजज़नजहाँमेंऔर
हमकोधोकायेथाकिपानीहै
याँहुए'मीर'तुमबराबरख़ाक
वाँवहीनाज़सरगिरानीहै
  - Meer Taqi Meer
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