vo apna gham na chhipaate to aur kya karte | वो अपना ग़म न छिपाते तो और क्या करते

  - Meena Bhatt
वोअपनाग़मछिपातेतोऔरक्याकरते
नज़रअपनीझुकातेतोऔरक्याकरते
अज़लसेदुश्मनीपालेथेयारहमसेेवो
हमारादिलजलातेतोऔरक्याकरते
रवानीचाहतीहैज़िंदगीहमारीभी
क़दमअगरबढ़ातेतोऔरक्याकरते
क़ज़ाजोआईथीअपनेतोसाथलेनेको
हाथउससेेमिलातेतोऔरक्याकरते
भड़करहीथीजोआतिशयहाँपेनफ़रतकी
अगरउसकोबुझातेतोऔरक्याकरते
हुएथेख़्वाबहमारेसभीमुकम्मलयूँँ
हिनाकोगररचातेतोऔरक्याकरते
ज़मीरबेचनाआताथातोइसदिलको
किख़ालीहाथआतेतोऔरक्याकरते
नएक़लमसेलिखीथीनईग़ज़ल'मीना'
सुनानेउनकोजातेतोऔरक्याकरते
  - Meena Bhatt
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