daur-e-haazir men bala ki nafratein mashghool hain | दौर-ए-हाज़िर में बला की नफ़रतें मशग़ूल हैं

  - Meena Bhatt
दौर-ए-हाज़िरमेंबलाकीनफ़रतेंमशग़ूलहैं
परमुहब्बतकोहमारीकाविशेंमशग़ूलहैं
हैंकहींमशग़ूलइंसाज़िंदगीकीदौड़में
औरकहींइंसाकेअंदरसाज़िशेंमशग़ूलहैं
अयग़ज़लतूखिलखिला,मायूसियोंकोछोड़दे
रंज-ओ-ग़मकेदौरमेंभीमहफ़िलेंमशग़ूलहैं
तबतलकहरसूमिलेंगीसाज़िशेंहीसाज़िशें
जबतलकइंसाकेदिलमेंख़्वाहिशेंमशग़ूलहैं
कौनहैजिसकीमहकमेंरमचुकींसाँसेंमेरी
रामजानेकिसकीधुनपरधड़कनेंमशग़ूलहै
रोज़ख़ंजरघोंपतीहैं,आपकीयादेंमुझे
यानीमेरेक़त्लमेंअबफ़ुर्क़तेंमशग़ूलहैं
लहजा-शीरीं,कररहाहै,उनकीहरफ़ितरतबयाँ
मुस्कराहटकेपरे,कुछरंजिशेंमशग़ूलहैं
  - Meena Bhatt
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