raah-e-ulfat se pareshaan kidhar jaata hai | राह-ए-उल्फ़त से परेशान किधर जाता है

  - Meena Bhatt
राह-ए-उल्फ़तसेपरेशानकिधरजाताहै
अपनीमंज़िलसेभीअनजानकिधरजाताहै
झूठसेहारकेनादानकिधरजाताहै
मारकेअपनातूईमानकिधरजाताहै
बिकरहाहूँसरेबाज़ारतेरीशर्तोपर
देकेमुझकोतूयेनुक़सानकिधरजाताहै
तेरीयादोंकाउठाथाजोमेरेसीनेसे
देखनाहैकिवोतूफ़ानकिधरजाताहै
मैंइसीसोचमेंउलझीहूँबड़ीमुद्दतसे
बादमरनेकेयेइंसानकिधरजाताहै
क़त्लकरतीहूँहरइकलम्हातेरीयादोंका
तूबनाकेमुझेशमशानकिधरजाताहै
मय-कदाभीहैतेराघरभीसनम-ख़ानाभी
आज़मानाहैकिअबध्यानकिधरजाताहै
नेकियाँछोड़केजिसनेजोकमायामीना
देखिएलेकेवोसामानकिधरजाताहै
  - Meena Bhatt
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