kya kahooñ dil ne mujhe ulfat men paagal kar diya | क्या कहूँ दिल ने मुझे उल्फ़त में पागल कर दिया

  - Meena Bhatt
क्याकहूँदिलनेमुझेउल्फ़तमेंपागलकरदिया
थोड़ामेंपहलेसेथाउसनेमुकम्मलकरदिया
अपनीआँखोंकासनमतूनेतोकाजलकरदिया
आँखसेछूकरबदनकोतूनेसंदलकरदिया
शहरमेंचर्चेबड़ेमैलायेआँचलकरदिया
क्याकहेंदिलरूहकोभीमेरीघाइलकरदिया
खोटनीयतमेंथीवोदेतारहाधोखामुझे
लम्हा-लम्हाख़ुदकोआँखोंसेहीओझलकरदिया
ज़ीस्तमेंख़ुशियोंकीमेरेयूँँरवानीगई
मसअलामेरामेरेमौलानेख़ुदहलकरदिया
मैंतोदरियाथीमुझेमिलनाथासागरसेमगर
वस्लकालंबासफ़रदुनियानेला-हलकरदिया
ढूँढतीआँखेंहैं'मीना'कीहमेशाहीतुझे
ज़ीस्तकासाजनतेरेहीनामहरपलकरदिया
  - Meena Bhatt
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