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Meem Maroof Ashraf
zamaane bhar men taarifein hon teri
zamaane bhar men taarifein hon teri | ज़माने भर में ता'रीफ़ें हों तेरी
- Meem Maroof Ashraf
ज़माने
भर
में
ता'रीफ़ें
हों
तेरी
तू
इतना
ख़ूब-सूरत
भी
नहीं
है
- Meem Maroof Ashraf
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किस
लिए
देखती
हो
आईना
तुम
तो
ख़ुद
से
भी
ख़ूब-सूरत
हो
Jaun Elia
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वो
सच्चाई
की
मूरत
भी
नहीं
थी
उसे
मेरी
ज़रूरत
भी
नहीं
थी
मैं
जिस
शिद्दत
से
उसको
चाहता
था
वो
उतनी
ख़ूब-सूरत
भी
नहीं
थी
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Tanveer Ghazi
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क्या
बोला
मुझे
ख़ुद
को
तुम्हारा
नहीं
कहना
ये
बात
कभी
मुझ
सेे
दुबारा
नहीं
कहना
ये
हुक़्म
भी
उस
जान
से
प्यारे
ने
दिया
है
कुछ
भी
हो
मुझे
जान
से
प्यारा
नहीं
कहना
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Ali Zaryoun
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इतनी
जल्दी
न
गिरा
अपने
हसीं
रुख़
पे
नक़ाब
तू
मुझे
ठीक
से
हैरान
तो
हो
लेने
दे
Rajesh Reddy
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दो
तुंद
हवाओं
पर
बुनियाद
है
तूफ़ाँ
की
या
तुम
न
हसीं
होते
या
में
न
जवाँ
होता
Arzoo Lakhnavi
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हद
से
बढ़
कर
हसीन
लगते
हो
झूटी
क़स
में
ज़रूर
खाया
करो
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Abdul Hamid Adam
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लगा
जब
कि
दुनिया
की
पहली
ज़रूरत
मोहब्बत
है
तब
उसने
माना
यक़ीं
हो
गया
जब
मोहब्बत
ज़रूरत
है
तब
उसने
माना
वगरना
तो
ये
लोग
उसे
ख़ुद-कुशी
के
लिए
कह
चुके
थे
उसे
आइने
ने
बताया
कि
वो
ख़ूब-सूरत
है
तब
उसने
माना
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Vikram Gaur Vairagi
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या'नी
कि
इश्क़
अपना
मुकम्मल
नहीं
हुआ
गर
मैं
तुम्हारे
हिज्र
में
पागल
नहीं
हुआ
वो
शख़्स
सालों
बाद
भी
कितना
हसीन
है
वो
रंग
कैनवस
पे
कभी
डल
नहीं
हुआ
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Kushal Dauneria
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हसीन
लड़की
से
दिल
लगाना
भी
इक
ख़ता
है
मुझे
पता
है
अगर
सज़ा
में
मिले
क़ज़ा
तो
अलग
मज़ा
है
मुझे
पता
है
Jatin shukla
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तुम
तो
सर्दी
की
हसीं
धूप
का
चेहरा
हो
जिसे
देखते
रहते
हैं
दीवार
से
जाते
हुए
हम
Nomaan Shauque
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लौट
कर
आ
गया
दिसंबर
भी
वो
मगर
लौट
कर
नहीं
आया
Meem Maroof Ashraf
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इक
वही
सुब्ह-ओ-शाम
है
'क़ैसर'
और
क्या
तुझ
को
काम
है
'क़ैसर
अब
तो
बस
ख़ुद-कुशी
ही
रस्ता
है
और
वो
भी
हराम
है
'क़ैसर'
अब
यक़ीं
किस
पे
कीजिएगा
भला
हर
कोई
ख़ुश-कलाम
है
'क़ैसर'
हम
ने
चाहा
था
टूट
कर
उस
को
ख़ूब
ये
इत्तिहाम
है
'क़ैसर'
जिस
के
हर
शे'र
में
है
तू
पिंहाँ
उस
ही
शाइर
का
नाम
है
'क़ैसर'
बेशक
इंसान
है
ख़सारे
में
ये
ख़ुदा
का
कलाम
है
'क़ैसर'
देखो
जिस
ज़ाविये
से
दिल-कश
है
वो
तो
माह-ए-तमाम
है
'क़ैसर'
जब
से
देखा
है
वो
तन-ए-'उर्यां
हर
घड़ी
तिश्ना-काम
है
'क़ैसर'
जबकि
मुद्दत
से
मेरे
साथ
नहीं
क्यूँ
वो
फिर
हम-ख़िराम
है
'क़ैसर'
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Meem Maroof Ashraf
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फ़क़त
इतना
बताना
चाहता
है
दिवाना
तुझ
को
कितना
चाहता
है
नहीं
ख़्वाहिश
इसे
दैर-ओ-हरम
की
तेरी
बाँहों
में
मरना
चाहता
है
ये
दिल
बर्बाद
होने
के
लिए
फिर
मोहब्बत
का
सहारा
चाहता
है
नहीं
'अशरफ़'
को
दुनिया
से
मोहब्बत
ये
दुनिया
से
किनारा
चाहता
है
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Meem Maroof Ashraf
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न
जाने
भेस
में
वो
किस
के
डस
ले
वो
नागिन
इच्छाधारी
हो
गई
है
Meem Maroof Ashraf
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ज़ुल्म
जो
भी
किया
गया
हम
पर
सामने
सब
ख़ुदा
के
रखना
है
Meem Maroof Ashraf
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