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Meem Maroof Ashraf
faqat itnaa bataana chahta hai
faqat itnaa bataana chahta hai | फ़क़त इतना बताना चाहता है
- Meem Maroof Ashraf
फ़क़त
इतना
बताना
चाहता
है
दिवाना
तुझ
को
कितना
चाहता
है
नहीं
ख़्वाहिश
इसे
दैर-ओ-हरम
की
तेरी
बाँहों
में
मरना
चाहता
है
ये
दिल
बर्बाद
होने
के
लिए
फिर
मोहब्बत
का
सहारा
चाहता
है
नहीं
'अशरफ़'
को
दुनिया
से
मोहब्बत
ये
दुनिया
से
किनारा
चाहता
है
- Meem Maroof Ashraf
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फूल
से
लेकर
ये
धनिया
लाने
तक
के
इस
सफ़र
को
मुझको
तेरे
साथ
ही
तय
करने
की
ख़्वाहिश
है
पगली
Harsh saxena
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मैंने
ख़्वाबों
में
भी
तेरे
जिस्म
की
ख़्वाहिश
न
रक्खी
गर
तुझे
यूँँ
प्यार
कोई
और
कर
पाए
तो
कहना
Harsh saxena
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ख़्वाहिश
सुखाने
रक्खी
थी
कोठे
पे
दोपहर
अब
शाम
हो
चली
मियाँ
देखो
किधर
गई
Adil Mansuri
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उस
की
ख़्वाहिश
पे
तुम
को
भरोसा
भी
है
उस
के
होने
न
होने
का
झगड़ा
भी
है
लुत्फ़
आया
तुम्हें
गुमरही
ने
कहा
गुमरही
के
लिए
एक
ताज़ा
ग़ज़ल
Irfan Sattar
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ख़्वाहिश
सब
रखते
हैं
तुझको
पाने
की
और
फिर
अपनी
अपनी
क़िस्मत
होती
है
Bhaskar Shukla
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मुझ
को
ख़्वाहिश
है
उसी
शान
की
दिवाली
की
लक्ष्मी
देश
में
उल्फ़त
की
शब-ओ-रोज़
रहे
देश
को
प्यार
से
मेहनत
से
सँवारें
मिल
कर
अहल-ए-भारत
के
दिलों
में
ये
'कँवल'
सोज़
रहे
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Kanval Dibaivi
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मेरी
ख्वाहिश
है
कि
तुझे
फूलों
से
फतह
करूँ
वरना
ये
काम
तो
तलवार
भी
कर
सकती
है
Azhar Faragh
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हज़ारों
ख़्वाहिशें
ऐसी
कि
हर
ख़्वाहिश
पे
दम
निकले
बहुत
निकले
मिरे
अरमान
लेकिन
फिर
भी
कम
निकले
Mirza Ghalib
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मेरे
होंटों
पे
किसी
लम्स
की
ख़्वाहिश
है
शदीद
ऐसा
कुछ
कर
मुझे
सिगरेट
को
जलाना
न
पड़े
Umair Najmi
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वो
ज़ालिम
मेरी
हर
ख़्वाहिश
ये
कह
कर
टाल
जाता
है
दिसंबर
जनवरी
में
कोई
नैनीताल
जाता
है?
Munawwar Rana
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तुझ
को
हर
हाल
हम
ने
पाना
था
वो
ज़माना
भी
क्या
ज़माना
था
इस
क़दर
ही
तो
पास
थे
हम
तुम
जिस
क़दर
हम
को
दूर
जाना
था
नाज़नीं,
ग़ैर
ने
तो
बस
तेरे
जिस्म
का
फ़ाएदा
उठाना
था
देख
अब
और
अच्छी
लगती
है
यार
चश्मा
नहीं
लगाना
था
बात
अल-क़िस्सा-मुख़्तसर
ये
है
इक
हसीना
थी
इक
दिवाना
था
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Meem Maroof Ashraf
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तिरा
यूँँ
छोड़
चले
जाना
कुछ
कमाल
नहीं
तिरा
पलट
के
न
आना
कमाल
समझूँगा
Meem Maroof Ashraf
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अब
तो
वो
शख़्स
मिरा
कुछ
भी
नहीं
लगता
है
पर
ये
लगता
है
मुझे
कुछ
तो
मगर
लगता
है
Meem Maroof Ashraf
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बात
आती
है
दोस्तों
की
जब
मुझ
को
दुश्मन
अज़ीज़
लगते
हैं
Meem Maroof Ashraf
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अव्वल
अव्वल
तो
बहुत
अक़्ल
से
उलझेगा
दिल
बाद
फिर
आप
ही
दिल
आप
को
समझाएगा
Meem Maroof Ashraf
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