ik vahii subh-o-shaam hai qaisar | इक वही सुब्ह-ओ-शाम है 'क़ैसर'

  - Meem Maroof Ashraf
इकवहीसुब्ह-ओ-शामहै'क़ैसर'
औरक्यातुझकोकामहै'क़ैसर
अबतोबसख़ुद-कुशीहीरस्ताहै
औरवोभीहरामहै'क़ैसर'
अबयक़ींकिसपेकीजिएगाभला
हरकोईख़ुश-कलामहै'क़ैसर'
हमनेचाहाथाटूटकरउसको
ख़ूबयेइत्तिहामहै'क़ैसर'
जिसकेहरशे'रमेंहैतूपिंहाँ
उसहीशाइरकानामहै'क़ैसर'
बेशकइंसानहैख़सारेमें
येख़ुदाकाकलामहै'क़ैसर'
देखोजिसज़ावियेसेदिल-कशहै
वोतोमाह-ए-तमामहै'क़ैसर'
जबसेदेखाहैवोतन-ए-'उर्यां
हरघड़ीतिश्ना-कामहै'क़ैसर'
जबकिमुद्दतसेमेरेसाथनहीं
क्यूँवोफिरहम-ख़िरामहै'क़ैसर'
  - Meem Maroof Ashraf
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