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Meem Maroof Ashraf
jaanta hooñ ki mire saath nahin muddat se
jaanta hooñ ki mire saath nahin muddat se | जानता हूँ कि मिरे साथ नहीं मुद्दत से
- Meem Maroof Ashraf
जानता
हूँ
कि
मिरे
साथ
नहीं
मुद्दत
से
फिर
भी
दिल
को
तिरे
होने
का
गुमाँ
होता
है
एक
हम
हैं
कि
वहीं
हैं
कि
जहाँ
बिछड़े
थे
एक
तू
है
कि
कभी
याँ
तो
वहाँ
होता
है
- Meem Maroof Ashraf
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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मौत
के
साथ
हुई
है
मिरी
शादी
सो
'ज़फ़र'
उम्र
के
आख़िरी
लम्हात
में
दूल्हा
हुआ
मैं
Zafar Iqbal
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अब
मज़ीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रक्खा
जाता
जिस
सेे
इक
शख़्स
का
पर्दा
नहीं
रक्खा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बाँधे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रक्खा
जाता
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Tehzeeb Hafi
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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बे-सबब
मरने
से
अच्छा
है
कि
हो
कोई
सबब
दोस्तों
सिगरेट
पियो
मय-ख़्वारियाँ
करते
रहो
Ameer Imam
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ये
मैंने
कब
कहा
कि
मेरे
हक़
में
फ़ैसला
करे
अगर
वो
मुझ
से
ख़ुश
नहीं
है
तो
मुझे
जुदा
करे
मैं
उसके
साथ
जिस
तरह
गुज़ारता
हूँ
ज़िंदगी
उसे
तो
चाहिए
कि
मेरा
शुक्रिया
अदा
करे
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Tehzeeb Hafi
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किसी
ने
ख़्वाब
में
आकर
मुझे
ये
हुक्म
दिया
तुम
अपने
अश्क
भी
भेजा
करो
दु'आओं
के
साथ
Afzal Khan
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इस
से
पहले
कि
तुझे
और
सहारा
न
मिले
मैं
तिरे
साथ
हूँ
जब
तक
मिरे
जैसा
न
मिले
Afkar Alvi
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मैं
जंगलों
की
तरफ़
चल
पड़ा
हूँ
छोड़
के
घर
ये
क्या
कि
घर
की
उदासी
भी
साथ
हो
गई
है
Tehzeeb Hafi
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आ
जाए
कौन
कब
कहाँ
कैसी
ख़बर
के
साथ
अपने
ही
घर
में
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
डर
के
साथ
Pratap Somvanshi
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अफ़सोस
मुझ
को
छोड़
के
जाने
से
पेश-तर
वो
जा
चुका
था
मुझ
को
ख़बर
बाद
में
हुई
Meem Maroof Ashraf
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उस
को
लगती
है
हँसी
झूटी
हँसी
खा
गई
मुझ
को
मिरी
झूटी
हँसी
Meem Maroof Ashraf
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अच्छा
जादू
कर
लेती
हो
सब
पर
क़ाबू
कर
लेती
हो
Meem Maroof Ashraf
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तिरा
यूँँ
छोड़
चले
जाना
कुछ
कमाल
नहीं
तिरा
पलट
के
न
आना
कमाल
समझूँगा
Meem Maroof Ashraf
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अभी
आग़ाज़-ए-उल्फ़त
है
चलो
इक
काम
करते
हैं
बिछड़
कर
देख
लेते
हैं
बिछड़
कर
कैसा
लगता
है
Meem Maroof Ashraf
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