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Meem Maroof Ashraf
abhii aaghaz-e-ulfat hai chalo ik kaam karte hain
abhii aaghaz-e-ulfat hai chalo ik kaam karte hain | अभी आग़ाज़-ए-उल्फ़त है चलो इक काम करते हैं
- Meem Maroof Ashraf
अभी
आग़ाज़-ए-उल्फ़त
है
चलो
इक
काम
करते
हैं
बिछड़
कर
देख
लेते
हैं
बिछड़
कर
कैसा
लगता
है
- Meem Maroof Ashraf
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मैं
न
सोया
रात
सारी
तुम
कहो
बिन
मेरे
कैसे
गुज़ारी,
तुम
कहो
हिज्र,
आँसू,
दर्द,
आहें,
शा'इरी
ये
तो
बातें
थीं
हमारी,
तुम
कहो
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Prakhar Kanha
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नाम
पे
हम
क़ुर्बान
थे
उस
के
लेकिन
फिर
ये
तौर
हुआ
उस
को
देख
के
रुक
जाना
भी
सब
से
बड़ी
क़ुर्बानी
थी
मुझ
से
बिछड़
कर
भी
वो
लड़की
कितनी
ख़ुश
ख़ुश
रहती
है
उस
लड़की
ने
मुझ
से
बिछड़
कर
मर
जाने
की
ठानी
थी
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Jaun Elia
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हिज्र
में
ख़ुद
को
तसल्ली
दी
कहा
कुछ
भी
नहीं
दिल
मगर
हँसने
लगा
आया
बड़ा
कुछ
भी
नहीं
Afkar Alvi
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पहले
लगा
था
हिज्र
में
जाएँगे
जान
से
पर
जी
रहे
हैं
और
भी
हम
इत्मीनान
से
Ankit Maurya
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तुम
सेे
बिछड़
जाने
का
ख़याल
अच्छा
है
क्योंकि
अभी
मेरा
भी
हाल
अच्छा
है
उसने
पूछा
तुम्हें
कितनी
महोब्बत
है
मुझ
सेे
मैंने
कहा
मालूम
नहीं
सवाल
अच्छा
है
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karan singh rajput
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मिरी
ज़िंदगी
तो
गुज़री
तिरे
हिज्र
के
सहारे
मिरी
मौत
को
भी
प्यारे
कोई
चाहिए
बहाना
Jigar Moradabadi
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तू
परिंदा
है
किसी
शाख़
को
घर
कर
लेगा
जो
तेरे
हिज्र
का
मारा
है
किधर
जाएगा
Shadab Javed
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हिज्र
की
रातें
इतनी
भारी
होती
हैं
जैसे
छाती
पर
ऐरावत
बैठा
हो
Tanoj Dadhich
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उभर
कर
हिज्र
के
ग़म
से
चुनी
है
ज़िंदगी
हमने
वगरना
हम
जहाँ
पर
थे
वहाँ
पर
ख़ुद-कुशी
भी
थी
Naved sahil
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दिल
हिज्र
के
दर्द
से
बोझल
है
अब
आन
मिलो
तो
बेहतर
हो
इस
बात
से
हम
को
क्या
मतलब
ये
कैसे
हो
ये
क्यूँँकर
हो
Ibn E Insha
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मुश्किल
हुआ
जाता
है
बहुत
रह
नहीं
पाते
अब
दर्द-ए-जुदाई
को
पिया
सह
नहीं
पाते
हम
साथ
तसव्वुर
में
तिरे
क्या
नहीं
करते
हाँ
वो
भी
सभी
कुछ
जो
कभी
कह
नहीं
पाते
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Meem Maroof Ashraf
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फ़क़त
इतना
बताना
चाहता
है
दिवाना
तुझ
को
कितना
चाहता
है
नहीं
ख़्वाहिश
इसे
दैर-ओ-हरम
की
तेरी
बाँहों
में
मरना
चाहता
है
ये
दिल
बर्बाद
होने
के
लिए
फिर
मोहब्बत
का
सहारा
चाहता
है
नहीं
'अशरफ़'
को
दुनिया
से
मोहब्बत
ये
दुनिया
से
किनारा
चाहता
है
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Meem Maroof Ashraf
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अन-गिनत
जिस्मों
की
सहूलत
थी
मुझ
को
पर
रूह
की
ज़रुरत
थी
जाने
कितने
ही
उस
पे
मरते
थे
जाने
कितनों
की
एक
चाहत
थी
वो
सिया
क़ल्ब
वाली
इक
लड़की
वाक़ई
कितनी
ख़ूब-सूरत
थी
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Meem Maroof Ashraf
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अब
भी
जानम
मना
रहे
हैं
हम
तेरा
मातम
मना
रहे
हैं
हम
तू
कि
ख़ुशियाँ
मना
रहा
है
वहाँ
याँ
तिरा
ग़म
मना
रहे
हैं
हम
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Meem Maroof Ashraf
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तुम्हें
इस
तरह
ही
भुलाना
है
मुमकिन
किसी
और
से
दिल
लगाना
पड़ेगा
Meem Maroof Ashraf
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