hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Manohar Shimpi
chhand se yaad hi nahin hoti
chhand se yaad hi nahin hoti | छंद से याद ही नहीं होती
- Manohar Shimpi
छंद
से
याद
ही
नहीं
होती
बहर
आज़ाद
ही
नहीं
होती
छेड़ते
नज़्म
जब
कोई
फिर
तो
तर्ज़
आबाद
ही
नहीं
होती
मिन्नतें
जब
करें
कोई
वालिद
फिर
वो
औलाद
ही
नहीं
होती
सिर्फ़
बूँदों
से
भी
कभी
अक्सर
फ़स्ल
बर्बाद
ही
नहीं
होती
चंद
लोगों
से
ही
कहाँ
यारों
कोई
तादाद
ही
नहीं
होती
बाग़
भी
तोड़ते
'मनोहर'
क्यूँँ
गुल
से
फ़रियाद
ही
नहीं
होती
- Manohar Shimpi
Download Ghazal Image
न
पूछो
मुझ
से
लज़्ज़त
ख़ानमाँ-बर्बाद
रहने
की
नशेमन
सैकड़ों
मैं
ने
बना
कर
फूँक
डाले
हैं
Allama Iqbal
Send
Download Image
28 Likes
अब
क्या
ही
ग़म
मनाएँ
कि
क्या
क्या
हुआ
मियाँ
बर्बाद
होना
ही
था
सो
बर्बाद
हो
गए
shaan manral
Send
Download Image
3 Likes
मुझ
को
तो
होश
नहीं
तुम
को
ख़बर
हो
शायद
लोग
कहते
हैं
कि
तुम
ने
मुझे
बर्बाद
किया
Josh Malihabadi
Send
Download Image
47 Likes
बर्बाद
कर
दिया
हमें
परदेस
ने
मगर
माँ
सब
से
कह
रही
है
कि
बेटा
मज़े
में
है
Munawwar Rana
Send
Download Image
53 Likes
वक़्त
बर्बाद
करने
वालों
को
वक़्त
बर्बाद
कर
के
छोड़ेगा
Divakar Rahi
Send
Download Image
34 Likes
बर्बाद
गुलिस्ताँ
करने
को
बस
एक
ही
उल्लू
काफ़ी
था
हर
शाख़
पे
उल्लू
बैठा
है
अंजाम-ए-गुलिस्ताँ
क्या
होगा
Shauq Bahraichi
Send
Download Image
45 Likes
याद
आओ
मुझे
लिल्लाह
न
तुम
याद
करो
मेरी
और
अपनी
जवानी
को
न
बर्बाद
करो
Akhtar Shirani
Send
Download Image
27 Likes
मच्छरदानी
ऑलआउट
पे
पैसे
क्यूँ
बर्बाद
करूँँ
ख़ून
तो
उसने
चूस
लिया
है
मच्छर
से
अब
डरना
क्यूँँ
SHIV SAFAR
Send
Download Image
2 Likes
वैसे
तो
तुम्हीं
ने
मुझे
बर्बाद
किया
है
इल्ज़ाम
किसी
और
के
सर
जाए
तो
अच्छा
Sahir Ludhianvi
Send
Download Image
31 Likes
मुझे
पता
है
कि
बर्बाद
हो
चुका
हूँ
मैं
तू
मेरा
सोग
मना
मुझ
को
सोगवार
न
कर
Anjum Saleemi
Send
Download Image
27 Likes
Read More
हाँ
तुझे
बे-हिसाब
चाहा
था
हिज्र
में
इक
जवाब
चाहा
था
हुस्न
के
रंग
तो
निराले
हैं
आप
सा
माहताब
चाहा
था
ख़ास
मिलके
तुझे
वहाँ
हमदम
देखना
बे-हिजाब
चाहा
था
शोख़
सी
वो
अदा
बताती
है
हुस्न
को
ला-जवाब
चाहा
था
उस
नज़र
से
कहाँ
कभी
देखा
इश्क़
में
फिर
हुबाब
चाहा
था
झूठ
को
बे-नक़ाब
करना
था
इसलिए
सच
जवाब
चाहा
था
Read Full
Manohar Shimpi
Download Image
2 Likes
ज़ेहन
में
है
मुलाक़ात
तेरी
याद
है
आज
भी
बात
तेरी
इत्र
जैसे
महक
ख़ूब
आती
तेज़
जब
तू
करे
बात
तेरी
याद
तू
ख़ूब
आती
मुझे
ही
फिर
न
भूलूँ
हसीं
रात
तेरी
क्यूँ
झुकी
थी
तभी
वो
निगाहें
बेज़ुबाँ
तो
न
थी
बात
तेरी
चंद
लम्हें
लगे
सिर्फ़
मिलने
हिज्र
में
क्यूँ
कटी
रात
तेरी
दूर
रहके
यहीं
है
लगे
तू
कब
सुनी
पास
से
बात
तेरी
अब
न
कोई
मुलाक़ात
बातें
लफ़्ज़
था
में
रहें
बात
तेरी
देखते
ही
रहा
ख़ामुशी
से
शाम-ए-ग़म
से
भरी
रात
तेरी
ख़्वाब
ऐसे
मनोहर
न
देखे
वक़्त-बे-वक़्त
बारात
तेरी
Read Full
Manohar Shimpi
Download Image
1 Like
कू-ए-मलामत
बे-असर
है
आज
कल
फिर
हम-नवा
क्यूँँ
बे-ख़बर
है
आज
कल
Manohar Shimpi
Send
Download Image
1 Like
सितम
वो
ही
करे
दाद-ए-जफ़ा
भी
बहुत
सारे
हुए
उस
से
ख़फ़ा
भी
कभी
भी
बात
निकलेगी
वफ़ा
की
तभी
उल्फ़त
बताए
बा-वफ़ा
भी
अगर
बिस्मिल
हुआ
है
इश्क़
में
ही
उसी
का
हल
यहाँ
भी
है
रफ़ा
भी
उसूलों
से
जिया
है
कौन
यारों
किसी
भी
बात
क्यूँ
होते
ख़फ़ा
भी
दिलों
को
सादगी
छूती
तभी
फिर
वहाँ
से
दूर
रहता
बे-वफ़ा
भी
कभी
होते
किसी
के
हम
सहारे
तभी
तो
वक़्त
करता
है
वफ़ा
भी
तिरे
उस
इक
नज़र
के
ही
लिए
तो
"मनोहर"
हम
मिले
कितने
दफ़ा
भी
Read Full
Manohar Shimpi
Download Image
1 Like
ऐब
है
तो
गुमान
में
क्या
है
देख
लो
इस
बयान
में
क्या
है
फ़र्क
पड़ता
किसे
त'अल्लुक़
से
सच
कहूँ
ख़ानदान
में
क्या
है
आसमाँ
में
उड़े
परिंदे
जब
तीर
में
क्या
कमान
में
क्या
है
जालसाज़ी
हुई
पता
है
सब
ऐसे
फिर
इम्तिहान
में
क्या
है
जब
दिल-ओ-दिल
से
ख़ुश
कोई
हो
फिर
सातवें
आसमान
में
क्या
है
नींव
जब
झूठ
के
सहारे
हो
होंठ
पर
क्या
ज़बान
में
क्या
है
जैसे
हो
वैसे
ही
रहो
तुम
भी
झूठ
के
आन-बान
में
क्या
है
जब
'मनोहर'
शुऊर
ही
बोले
ज़ेहन
में
और
ध्यान
में
क्या
है
Read Full
Manohar Shimpi
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Poverty Shayari
Sardi Shayari
Hijr Shayari
Faith Shayari
Delhi Shayari