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Manohar Shimpi
koo-e-malaamat be-asar hai aaj kal
koo-e-malaamat be-asar hai aaj kal | कू-ए-मलामत बे-असर है आज कल
- Manohar Shimpi
कू-ए-मलामत
बे-असर
है
आज
कल
फिर
हम-नवा
क्यूँँ
बे-ख़बर
है
आज
कल
- Manohar Shimpi
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खुले
दिल
से
मुझे
वो
मानता
भी
है
कई
फिर
राज़
है
जो
जानता
भी
है
यकायक
जब
सर-ए-महफ़िल
में
मिलता
तो
रफ़ाक़त
से
वो
सीना
तानता
भी
है
मुफ़स्सल
माजरा
जब
इल्म
का
है
तब
इरादा
शक्ल
से
पहचानता
भी
है
किसी
से
ही
न
लड़ता
और
कुछ
कहता
ख़ुदाई
फिर
ख़ुदा
की
मानता
भी
है
'मनोहर'
अब
दिल-ओ-दिल
में
वही
बसता
वो
भी
जी
जान
से
सब
जानता
भी
है
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Manohar Shimpi
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रोष
इतना
बढ़ा
बढ़ा
सा
है
हर
कोई
फिर
ख़फ़ा
ख़फ़ा
सा
है
Manohar Shimpi
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मुश्किलों
से
ही
भरे
थे
दिन
वो
सारे
ना-ख़ुदा
बनके
हमीं
आए
किनारे
उम्र
भर
का
साथ
अब
होता
नहीं
है
आज
रहता
कौन
है
किसके
सहारे
हुस्न
के
भी
रंग
अब
रंगीन
होते
देखने
से
ही
हसीं
दिखते
नज़ारे
कौन
अपना
कौन
फिर
था
ही
पराया
साथ
में
थे
वो
हुए
कब
ही
हमारे
ऐ
मुहब्बत
मुश्किलों
का
ही
सफ़र
है
इश्क़
कैसे
फिर
रहे
आसान
प्यारे
आसमाँ
में
गर्द
उड़ती
है
'मनोहर'
इसलिए
खोते
भटकते
हैं
सितारे
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Manohar Shimpi
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पामाल
रस्ते
और
ही
दुश्वार
होते
ज़िंदगी
राह-ए-सफ़र
के
ही
लिए
संस्कार
होते
ज़िंदगी
Manohar Shimpi
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इस
क़दर
पल
मिरा
बीतता
ही
गया
हार
के
बाद
सब
जीतता
ही
गया
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