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Manish Pithaya
tarjani par gin saza ke din mere tu
tarjani par gin saza ke din mere tu | तर्जनी पर गिन सज़ा के दिन मेरे तू
- Manish Pithaya
तर्जनी
पर
गिन
सज़ा
के
दिन
मेरे
तू
इक
मुझी
पर
जुर्म
का
दावा
चला
है
- Manish Pithaya
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अब
के
हम
तर्क-ए-रसूमात
करके
देखते
हैं
बीच
वालों
के
बिना
बात
करके
देखते
हैं
इस
सेे
पहले
कि
कोई
फ़ैसला
तलवार
करे
आख़िरी
बार
मुलाक़ात
करके
देखते
हैं
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Abrar Kashif
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शौक़,लत,आवारगी,अय्याशी
में
गुज़री
हमारी
ज़िन्दगी
अब
तू
मुनासिब
सी
सज़ा
दे
गिनती
करके
Kartik tripathi
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बिछड़ते
वक़्त
भी
हिम्मत
नहीं
जुटा
पाया
कभी
भी
उस
को
गले
से
नहीं
लगा
पाया
किसी
को
चाहते
रहने
की
सज़ा
पाई
है
मैं
चार
साल
में
लड़की
नहीं
पटा
पाया
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Shadab Asghar
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हमारे
कुछ
गुनाहों
की
सज़ा
भी
साथ
चलती
है
हम
अब
तन्हा
नहीं
चलते
दवा
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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हसीन
लड़की
से
दिल
लगाना
भी
इक
ख़ता
है
मुझे
पता
है
अगर
सज़ा
में
मिले
क़ज़ा
तो
अलग
मज़ा
है
मुझे
पता
है
Jatin shukla
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तरीक़े
और
भी
हैं
इस
तरह
परखा
नहीं
जाता
चराग़ों
को
हवा
के
सामने
रक्खा
नहीं
जाता
मोहब्बत
फ़ैसला
करती
है
पहले
चंद
लम्हों
में
जहाँ
पर
इश्क़
होता
है
वहाँ
सोचा
नहीं
जाता
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Abrar Kashif
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अब
हवाएँ
ही
करेंगी
रौशनी
का
फ़ैसला
जिस
दिए
में
जान
होगी
वो
दिया
रह
जाएगा
Mahshar Badayuni
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मुन्सिफ़
हो
अगर
तुम
तो
कब
इंसाफ़
करोगे
मुजरिम
हैं
अगर
हम
तो
सज़ा
क्यूँँ
नहीं
देते
Ahmad Faraz
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कौन
डूबेगा
किसे
पार
उतरना
है
'ज़फ़र'
फ़ैसला
वक़्त
के
दरिया
में
उतर
कर
होगा
Ahmad Zafar
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वक़्त
पर
फ़ैसला
नहीं
करते,
और
फिर
'काश!..काश!'
करते
हो।
Tanoj Dadhich
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आलम-ए-इंसानियत
क्या
देखिए
ज़ात
मज़हब
का
तमाशा
देखिए
जाँ
लुटा
दी
रौशनी
के
वास्ते
कैसा
पागल
है
पतंगा
देखिए
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Manish Pithaya
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उठी
थी
आग
चिंगारी
से
देखो
लगी
थी
शक
कि
बीमारी
से
देखो
कि
दानाई
को
तुम
रक्खो
परे
अब
निभा
के
तुम
भी
दिलदारी
से
देखो
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Manish Pithaya
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मुसलसल
हम
भटकते
तीरगी
में
न
लाते
गर
हमें
तुम
रौशनी
में
Manish Pithaya
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अना
हिर्स-ओ-हवस
नफ़रत
कभी
सजने
नहीं
देंगे
सजाया
है
अगर
जीवन
मोहब्बत
ने
सजाया
है
Manish Pithaya
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बात
गूँगो
की
समझनी
हो
अगर
उन
के
हाथों
का
इशारा
देखिए
Manish Pithaya
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