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Manish Pithaya
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u | उठी थी आग चिंगारी से देखो
- Manish Pithaya
उठी
थी
आग
चिंगारी
से
देखो
लगी
थी
शक
कि
बीमारी
से
देखो
कि
दानाई
को
तुम
रक्खो
परे
अब
निभा
के
तुम
भी
दिलदारी
से
देखो
- Manish Pithaya
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मिटता
रहा
बदन
हस्ती
कब
रही
किसी
की
साँसें
न
लड़
सकीं
तो
मख़्लूक
छोड़
आया
Manish Pithaya
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अना
हिर्स-ओ-हवस
नफ़रत
कभी
सजने
नहीं
देंगे
सजाया
है
अगर
जीवन
मोहब्बत
ने
सजाया
है
Manish Pithaya
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तू
ही
तो
सब
सेे
पास
है
तुझ
सेे
मेरा
हर
श्वास
है
देखो
ख़ुदा
ये
हर
जगह
मौजूद
है
एहसास
है
नूर-ए-हक़ीक़त
पा
लिया
फिर
हर
नज़ारा
ख़ास
है
जब
तू
मिला
तो
मिट
गई
इस
आत्मा
की
प्यास
है
मुझ
बे-अदब
मग़रूर
को
रहम-ओ-करम
की
आस
है
ये
इश्क़
हासिल
है
उसे
जिसका
अटल
विश्वास
है
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Manish Pithaya
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ज़माने
को
ज़रूरत
है
मोहब्बत
की
मुरव्वत
की
मगर
हमने
तो
नफ़रत
के
सिवा
दिल
में
रखा
क्या
है
Manish Pithaya
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आलम-ए-इंसानियत
क्या
देखिए
ज़ात
मज़हब
का
तमाशा
देखिए
जाँ
लुटा
दी
रौशनी
के
वास्ते
कैसा
पागल
है
पतंगा
देखिए
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Manish Pithaya
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