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Manas Ank
itnaa bhi koi shor sharaaba nahin hua
itnaa bhi koi shor sharaaba nahin hua | इतना भी कोई शोर शराबा नहीं हुआ
- Manas Ank
इतना
भी
कोई
शोर
शराबा
नहीं
हुआ
लेकिन
वो
शख़्स
फिर
भी
हमारा
नहीं
हुआ
उसने
कहा
बगै़र
मिरे
ख़ुश
रहोगे
तुम
मेरा
तो
चैन
से
भी
गुज़ारा
नहीं
हुआ
- Manas Ank
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दुश्मनी
का
सफ़र
इक
क़दम
दो
क़दम
तुम
भी
थक
जाओगे
हम
भी
थक
जाएँगे
Bashir Badr
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रुके
रुके
से
क़दम
रुक
के
बार
बार
चले
क़रार
दे
के
तिरे
दर
से
बे-क़रार
चले
Gulzar
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मंज़िल
पे
न
पहुँचे
उसे
रस्ता
नहीं
कहते
दो
चार
क़दम
चलने
को
चलना
नहीं
कहते
इक
हम
हैं
कि
ग़ैरों
को
भी
कह
देते
हैं
अपना
इक
तुम
हो
कि
अपनों
को
भी
अपना
नहीं
कहते
कम-हिम्मती
ख़तरा
है
समुंदर
के
सफ़र
में
तूफ़ान
को
हम
दोस्तो
ख़तरा
नहीं
कहते
बन
जाए
अगर
बात
तो
सब
कहते
हैं
क्या
क्या
और
बात
बिगड़
जाए
तो
क्या
क्या
नहीं
कहते
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Nawaz Deobandi
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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आज
फिर
कुफ़्र
कमाया
हमने
शोर
को
शे'र
सुनाया
हमने
Vishal Bagh
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मोहब्बत
दो-क़दम
पर
थक
गई
थी
मगर
ये
हिज्र
कितना
चल
रहा
है
Zubair Ali Tabish
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उसी
वक़्त
अपने
क़दम
मोड़
लेना
नदी
पार
से
जब
इशारा
करूँँगा
Siddharth Saaz
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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कोई
शहर
था
जिसकी
एक
गली
मेरी
हर
आहट
पहचानती
थी
मेरे
नाम
का
इक
दरवाज़ा
था
इक
खिड़की
मुझको
जानती
थी
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Ali Zaryoun
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दिया
जला
के
सभी
बाम-ओ-दर
में
रखते
हैं
और
एक
हम
हैं
इसे
रह-गुज़र
में
रखते
हैं
समुंदरों
को
भी
मालूम
है
हमारा
मिज़ाज
कि
हम
तो
पहला
क़दम
ही
भँवर
में
रखते
हैं
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Abrar Kashif
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नहीं
चलती
कभी
मर्ज़ी
हमारी
बताओ
तो
ज़रा
ग़लती
हमारी
जहाँ
पर
तैरने
को
कह
रहे
हो
वहीं
पर
डूबी
है
कश्ती
हमारी
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Manas Ank
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कह
रही
सिलवटें
ये
बिस्तर
की
रात
तो
करवटों
में
गुज़री
है
Manas Ank
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मुहब्बत
ने
उजाड़ा
आदमी
को
उसी
के
ग़म
में
इतनी
पी
रहा
हैं
Manas Ank
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मुझको
तुम
देवता
बनाओ
मत
इंसाँ
की
खाल
में
ही
रहने
दो
Manas Ank
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हमारे
साथ
भी
धोखा
हुआ
है
मगर
ये
कौन-सा
पहला
हुआ
है
करेंगी
इश्क़
हम
सेे
आप
लेकिन
हमारा
दिल
बहुत
टूटा
हुआ
है
उठा
के
रख
लिया
है
आपने
जो
वो
सिक्का
तो
मिरा
फेंका
हुआ
है
मुझे
जिस
दाँव
पे
तुमने
लगाया
मिरा
ये
दाँव
तो
खेला
हुआ
है
कोई
कीचड़
में
पत्थर
धँस
गया
हो
कुछ
ऐसे
दुख
मिरा
बैठा
हुआ
है
जो
लड़का
धागे
बुनता
रस्सियों
के
वो
लड़का
रस्सी
से
लटका
हुआ
है
तेरे
ही
लम्स
का
जादू
है
लगता
तेरा
बीमार
अब
अच्छा
हुआ
है
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Manas Ank
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