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Manas Ank
nahin chalti kabhi marzi hamaari
nahin chalti kabhi marzi hamaari | नहीं चलती कभी मर्ज़ी हमारी
- Manas Ank
नहीं
चलती
कभी
मर्ज़ी
हमारी
बताओ
तो
ज़रा
ग़लती
हमारी
जहाँ
पर
तैरने
को
कह
रहे
हो
वहीं
पर
डूबी
है
कश्ती
हमारी
- Manas Ank
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जिसकी
ख़ातिर
हम
भुला
बैठे
हैं
दुनिया
दोस्तों
से
ही
उन्हें
फ़ुर्सत
नहीं
है
Shashank Shekhar Pathak
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बताऊँ
क्या
तुझे
ऐ
हम-नशीं
किस
से
मोहब्बत
है
मैं
जिस
दुनिया
में
रहता
हूँ
वो
इस
दुनिया
की
औरत
है
Asrar Ul Haq Majaz
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एक
हमें
आवारा
कहना
कोई
बड़ा
इल्ज़ाम
नहीं
दुनिया
वाले
दिल
वालों
को
और
बहुत
कुछ
कहते
हैं
Habib Jalib
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एक
तरफ़
है
पूरी
दुनिया
एक
तरफ़
है
मेरा
घर
लेकिन
तुमको
बतला
दूँ
मैं
दुनिया
से
है
अच्छा
घर
सब
कमरों
की
दीवारों
पर
तस्वीरें
हैं
बस
तेरी
मुझ
सेे
ज़ियादा
तो
लगता
है
जानेमन
ये
तेरा
घर
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Tanoj Dadhich
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ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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हम
क्या
करें
अगर
न
तिरी
आरज़ू
करें
दुनिया
में
और
भी
कोई
तेरे
सिवा
है
क्या
Hasrat Mohani
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तुम्हारे
साथ
था
तो
मैं
गम-ए-उल्फ़त
में
उलझा
था
तुम्हें
छोड़ा
तो
ये
जाना
कि
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
Nirbhay Nishchhal
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अपनी
दुनिया
भी
चल
पड़े
शायद
इक
रुका
फ़ैसला
किया
जाए
Madan Mohan Danish
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दुनिया
ने
बोला
के
तुम
सेे
नहीं
होगा
अच्छा
है
मैं
थोड़ा
ऊँचा
सुनता
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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नहीं
चलती
कभी
मर्ज़ी
हमारी
बताओ
तो
ज़रा
ग़लती
हमारी
जहाँ
पर
तैरने
को
कह
रहे
हो
वहीं
पर
डूबी
है
कश्ती
हमारी
यहाँ
भौंरा
कली
को
खा
गया
है
कि
जो'कर
से
मरी
रानी
हमारी
बड़ी
मुश्किल
से
ही
हमको
मिली
थी
उठा
ली
आपने
कुर्सी
हमारी
त'अल्लुक़
आपका
हम
सेे
नहीं
जब
तो
क्यूँ
फिर
चाटते
जूती
हमारी
कुआँ
कब
आएगा
इस
प्यासे
के
पास
कि
रस्ता
देखती
खिड़की
हमारी
बग़ीचे
पर
तुम्हें
इतना
गुमाँ
है
रखो
तुम
फूल
है
तितली
हमारी
बड़ा
महँगा
बताते
थे
हमें
तुम
लगी
बोली
यहाँ
सस्ती
हमारी
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Manas Ank
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चूमकर
वो
मुझे
बाद
में
बोलती
सच
कहो
तुमको
मुझ
सेे
वफा
तो
नहीं
Manas Ank
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पिता
की
बात
अपने
मान
लो
तुम
नहीं
होगी
कभी
शादी
हमारी
Manas Ank
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रूह
पर
डाले
हैं
पर्दे
जिस्म
के
सबको
रहते
बस
ये
नखरे
जिस्म
के
जो
लगे
चमकाने
में
फिर
जिस्म
को
लग
गए
है
रोग
सारे
जिस्म
के
लड़कियों
को
क्यूँ
ये
लगता
रहता
है
सिर्फ़
लड़के
होते
भूखे
जिस्म
के
हुस्न
दो
पल
का
तुम्हारा
अब
हमें
तुम
पढ़ाओगी
पहाड़े
जिस्म
के
जान
तो
इन
में
बची
अब
है
नहीं
फूँक
दो
फिर
जाके
पुतले
जिस्म
के
मौत
बैठी
रहती
धोबीघाट
पे
बाँधती
है
सबके
कपड़े
जिस्म
के
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Manas Ank
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बरसता
है
कहीं
और
अब
वो
जाकर
जिसे
कहते
थे
ये
बादल
मेरा
है
Manas Ank
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