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Kabir Altamash
jaane waale bas ik baar saheeh zaraa dekh mujhe
jaane waale bas ik baar saheeh zaraa dekh mujhe | जाने वाले बस इक बार सहीह ज़रा देख मुझे
- Kabir Altamash
जाने
वाले
बस
इक
बार
सहीह
ज़रा
देख
मुझे
हो
सकता
है
कि
तरस
आए
तुझको
और
न
जाए
तू
- Kabir Altamash
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कोई
होता
तो
उसको
सब
बताते
हम
हमारी
इक
कहानी
भी
सुनाते
हम
बहुत
ही
दूर
रहती
है
कोई
लड़की
यहाँ
रहती
तो
पलकों
पे
बिठाते
हम
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Kabir Altamash
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कभी
जब
ख़सारा
करूँँगा
तुम्हीं
को
पुकारा
करूँँगा
करूँँंगा
मुहब्बत
अगर
मैं
तुम्हीं
से
दुबारा
करूँँगा
अगर
मर
गए
आप
भी
तो
मैं
कैसे
गुज़ारा
करूँँगा
कभी
चूम
लूंगा
तुझे
मैं
कभी
बस
इशारा
करूँँगा
मुझे
भी
सही
से
पता
था
कि
हर
बार
हारा
करूँँगा
मुहब्बत
तुम्हीं
हो
तुम्हीं
को
ग़ज़ल
में
उतारा
करूँँगा
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Kabir Altamash
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थक
गए
हम
ज़िंदगी
से
जी
रहे
हैं
बेबसी
से
अब
पढ़ाई
ही
करूँगा
भर
गया
मन
आशिक़ी
से
दोस्त
तुम
सेे
पूछना
था
कुछ
मिला
क्या
दुश्मनी
से
हूँ
अकेला
ज़िंदगी
में
मुझको
क्या
है
फ़रवरी
से
जल
रहे
हैं
अबके
सारे
आदमी
ही
आदमी
से
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आ
गया
फिर
से
प्यार
का
मौसम
मेरा
मतलब
बहार
का
मौसम
इक
तो
अपना
बिहार
अच्छा
है
उसपे
अपने
बिहार
का
मौसम
ख़त्म
हो
जाऊँगा
वगरना
मैं
ख़त्म
कर
इंतज़ार
का
मौसम
याद
है
हम
मिले
कहाँ
पर
थे
याद
है
सोमवार
का
मौसम
हम
कभी
एक
साथ
थे
है
ना
था
कभी
ऐतबार
का
मौसम
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अच्छा
होगा
गर
ऐसा
हो
जाए
एक
पराया
ही
अपना
हो
जाए
होने
को
तो
कुछ
भी
हो
सकता
है
क्या
होगा
गर
तू
मेरा
हो
जाए
उसपर
तन्हाई
अच्छी
लगती
है
काश
कभी
वो
भी
तन्हा
हो
जाए
मैं
बेकार
नहीं
रोया
करता
हूँ
चाह
रहा
हूँ
तू
ज़िंदा
हो
जाए
रब
को
नौकर
तक
ये
बोल
रहा
है
मेरा
मालिक
बस
अच्छा
हो
जाए
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