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Kabir Altamash
roya hooñ KHud b KHud main sitam se nahin
roya hooñ KHud b KHud main sitam se nahin | रोया हूँ ख़ुद ब ख़ुद मैं सितम से नहीं
- Kabir Altamash
रोया
हूँ
ख़ुद
ब
ख़ुद
मैं
सितम
से
नहीं
डरता
हूँ
ख़ुद
से
मैं
पेच-ओ-ख़म
से
नहीं
मैंने
फिर
उस
सेे
पूछा
तुझे
प्यार
है
कह
दिया
फिर
से
उसने
क़सम
से
नहीं
क्या
कहा
प्यार
करता
हूँ
उस
लड़की
से
प्यार
मैं
और
उस
बेरहम
से
नहीं
ताकि
तुझको
पता
भी
नहीं
चल
सके
दूर
जाऊँगा
पर
एक
दम
से
नहीं
- Kabir Altamash
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क्या
सितम
करते
हैं
मिट्टी
के
खिलौने
वाले
राम
को
रक्खे
हुए
बैठे
हैं
रावण
के
क़रीब
Asghar Mehdi Hosh
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सर
पर
हवा-ए-ज़ुल्म
चले
सौ
जतन
के
साथ
अपनी
कुलाह
कज
है
उसी
बाँकपन
के
साथ
Majrooh Sultanpuri
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उम्र
के
आख़िरी
मक़ाम
में
हम
मिल
भी
जाए
तो
क्या
ख़ुशी
होगी
क्या
सितम
तुम
को
देखने
के
लिए
हम
को
दुनिया
भी
देखनी
होगी
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Vikram Sharma
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क्या
सितम
है,
लोग
मेरे
दुख
में
भी
बस
फाइलातुन
वाइलातुन
देखते
है
Saad Ahmad
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ख़ून
से
सींची
है
मैं
ने
जो
ज़मीं
मर
मर
के
वो
ज़मीं
एक
सितम-गर
ने
कहा
उस
की
है
Javed Akhtar
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इस
गए
साल
बड़े
ज़ुल्म
हुए
हैं
मुझ
पर
ऐ
नए
साल
मसीहा
की
तरह
मिल
मुझ
से
Sarfraz Nawaz
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सितम
भी
मुझ
पे
वो
करता
रहा
करम
की
तरह
वो
मेहरबाँ
तो
न
था
मेहरबान
जैसा
था
Anwar Taban
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ज़माना
ज़ुल्म
करता
है
ख़ुशी
से
कभी
तुझ
को
कभी
मुझ
को
सताए
Meem Alif Shaz
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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क्या
सितम
है
कि
अब
तिरी
सूरत
ग़ौर
करने
पे
याद
आती
है
Jaun Elia
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मेरे
अब्बू
सच
कहते
थे
बेटा
इक
दिन
पछताओगे
Kabir Altamash
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जाने
वाले
बस
इक
बार
सहीह
ज़रा
देख
मुझे
हो
सकता
है
कि
तरस
आए
तुझको
और
न
जाए
तू
Kabir Altamash
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ऐ
मेरे
रोने
पर
रोने
वाले
हम
अब
हैं
बस
तेरे
होने
वाले
यार
बहुत
रोएंगे
अब
हम
दोनों
इक
दूजे
को
हैं
हम
खोने
वाले
के
नींद
तुझे
कैसे
आ
जाती
है
ऐ
मेरे
बिस्तर
पर
सोने
वाले
इक
दिन
तुम
भी
बहुत
रोओगे,
समझे
मेरी
इन
आँखों
को
भिगोने
वाले
पहले
अपने
दिल
को
साफ
करो
तुम
बीस
दफा
चेहरे
को
धोने
वाले
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Kabir Altamash
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तुम
मुझको
रोने
पर
मजबूर
कभी
मत
करना
मैं
रोया
तो
मेरे
घर
वाले
भी
रोएंँगे
Kabir Altamash
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वहीं
पर
इक
जवानी
चल
रही
है
जहाँ
कोई
जवानी
ढल
रही
है
मैं
हूँ
मिट्टी
मगर
हूँ
उसके
हाथों
मुझे
वो
अपने
हाथों
मल
रही
है
तुम्हें
अब
वास्ता
क्यूँ
होगा
हम
सेे
तुम्हारी
ज़िन्दगी
तो
चल
रही
है
मुझे
तुझ
सेे
मुहब्बत
गर
नहीं
थी
मुझे
तेरी
कमी
क्यूँ
खल
रही
है
उसे
कुछ
मत
कहो
मेरे
रक़ीबों
वो
मेरे
मस'अलों
का
हल
रही
है
ये
धोका
बे-वफ़ाई
और
नफ़रत
वो
हर
इक
काम
में
अव्वल
रही
है
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Kabir Altamash
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