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Kabir Altamash
mere abboo sach kahte the
mere abboo sach kahte the | मेरे अब्बू सच कहते थे
- Kabir Altamash
मेरे
अब्बू
सच
कहते
थे
बेटा
इक
दिन
पछताओगे
- Kabir Altamash
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ऐसा
नहीं
बस
आज
तुझे
प्यार
करेंगे
ता'उम्र
यही
काम
लगातार
करेंगे
सरकार
करेगी
नहीं
इस
देश
का
उद्धार
उद्धार
करेंगे
तो
कलाकार
करेंगे
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Tanoj Dadhich
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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ये
सच
है
कि
पाँवों
ने
बहुत
कष्ट
उठाए
पर
पाँव
किसी
तरह
राहों
पे
तो
आए
Dushyant Kumar
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नहीं
थकते
मुझे
इल्ज़ाम
देते
भला
कब
तक
ये
बेरहमी
करोगे
अगर
सच
बोलने
मैं
लग
गया
तो
ग़लत
फ़हमी
ग़लत
फ़हमी
करोगे
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Gopesh "Tanha"
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अगर
सच
इतना
ज़ालिम
है
तो
हम
से
झूट
ही
बोलो
हमें
आता
है
पतझड़
के
दिनों
गुल-बार
हो
जाना
Ada Jafarey
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सच
बोलने
के
तौर-तरीक़े
नहीं
रहे
पत्थर
बहुत
हैं
शहर
में
शीशे
नहीं
रहे
Nawaz Deobandi
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सच
घटे
या
बढ़े
तो
सच
न
रहे
झूट
की
कोई
इंतिहा
ही
नहीं
Krishna Bihari Noor
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कुछ
रिश्तों
में
दिल
को
आज़ादी
नइँ
होती
कुछ
कमरों
में
रौशनदान
नहीं
होता
है
Vikram Gaur Vairagi
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मैं
आज
जो
भी
कहूँगा
तुम
सेे
वो
सच
है
जानम
ये
जान
लो
तुम
मिरी
ग़ज़ल
के
हरेक
मिसरे
से
मेरी
चाहत
झलक
रही
है
Amaan Pathan
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या'नी
तुम
वो
हो
वाक़ई
हद
है
मैं
तो
सच-मुच
सभी
को
भूल
गया
Jaun Elia
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पहले
करते
थे
पाप
अच्छा
जी
अच्छे
हैं
कब
से
आप
अच्छा
जी
आपसे
भूल
हो
गई
अच्छा
करना
है
फिर
मिलाप
अच्छा
जी
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Kabir Altamash
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तुम्हारे
दिल
से
निकल
कर
पछता
रहे
हैं
हम
सितम
तो
ये
है
कि
दिल
को
समझा
रहे
हैं
हम
कि
आओ
मुझको
चले
जाओ
तुम
कहीं
ले
कर
बहुत
अपने
आप
से
अब
उकता
रहे
हैं
हम
तुम्हें
क्या
मालूम
तुम
तो
अब
आई
हो
लड़की
किसी
लड़की
के
लिए
ही
क्या
क्या
रहे
हैं
हम
तुम्हारा
ये
प्यार
हम
सेे
क्या
क्या
कराएगा
ख़ुदा
ने
दी
है
ज़बाँ
पर
तुतला
रहे
हैं
हम
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Kabir Altamash
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आ
गया
फिर
से
प्यार
का
मौसम
मेरा
मतलब
बहार
का
मौसम
इक
तो
अपना
बिहार
अच्छा
है
उसपे
अपने
बिहार
का
मौसम
ख़त्म
हो
जाऊँगा
वगरना
मैं
ख़त्म
कर
इंतज़ार
का
मौसम
याद
है
हम
मिले
कहाँ
पर
थे
याद
है
सोमवार
का
मौसम
हम
कभी
एक
साथ
थे
है
ना
था
कभी
ऐतबार
का
मौसम
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Kabir Altamash
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हम
ज़रा
क्या
खफा
हो
गए
आप
तो
बे-वफ़ा
हो
गए
जान
थे
आप
मेरे
कभी
जान,
लेकिन
जुदा
हो
गए
है
बहुत
ही
बड़ा
मसअला
आप
ही
मसअला
हो
गए
चाहते
थे
मुझे
और
अब
जाने
किसपर
फिदा
हो
गए
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Kabir Altamash
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तुमको
है
बस
आमों
का
दुख
हमको
है
सब
पेड़ों
का
दुख
तुम
तो
इक
लड़की
हो
पगली
तुम
क्या
जानो
लड़कों
का
दुख
ऐ
रस्तों
पर
चलने
वालों
कब
समझोगे
रस्तों
का
दुख
जिन
लम्हों
में
टूट
गया
मैं
मुझको
है
उन
लम्हों
का
दुख
ऐ
ब्लूटूथ
लगाने
वाले
तुम
क्या
जानो
बहरों
का
दुख
तुमको
है
बस
इक
अपना
दुख
रब
को
है
हम
बंदों
का
दुख
उसको
चूम
नहीं
पाया
मैं
मुझ
सेे
पूछो
होंठों
का
दुख
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Kabir Altamash
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