shab ki tanhaaii men un ko yaad kar leta hooñ main | शब की तन्हाई में उन को याद कर लेता हूँ मैं

  - Mahboob Mashshar
शबकीतन्हाईमेंउनकोयादकरलेताहूँमैं
हैज़बाँख़ामोशपरफ़रियादकरलेताहूँमैं
चौदहवींशबकाक़मरजबचर्ख़परहँसनेलगे
शूमी-ए-क़िस्मतकोफिरसेयादकरलेताहूँमैं
कुछहुजूम-ए-यादसेकुछआरज़ू-ए-दीदसे
ज़िंदगीकोइसतरहबर्बादकरलेताहूँमैं
चश्म-ए-नमनेसोज़-ए-दिलकोकरदियाहैआश्कार
येनहींशिकवासनमफ़रियादकरलेताहूँमैं
आजतकबर्बादथा'महशर'हैअबउसकोसुकूँ
दिलकीवीरानीकोख़ुदआबादकरलेताहूँमैं
  - Mahboob Mashshar
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