koi qareeb na aa.e shikasta-paa hooñ main | कोई क़रीब न आए शिकस्ता-पा हूँ मैं

  - Mahboob Khizan
कोईक़रीबआएशिकस्ता-पाहूँमैं
करमतोहैमगरअंजामदेखताहूँमैं
मिरीनिगाहमेंकुछऔरढूँडनेवाले
तिरीनिगाहमेंकुछऔरढूँडताहूँमैं
ज़मानादेर-फ़रामोशतोनहींइतना
येठीकहैकिबहुतदेर-आश्नाहूँमैं
ग़लतनहींवोजोशिकवेअबआपकोहोंगे
बदलगयाहैज़मानाबदलगयाहूँमैं
मुझेसताओनहींज़िंदगीनिगाहमेंहै
फ़रेबखाओनहींतुमकोजानताहूँमैं
मिराग़ुरूर-ए-मोहब्बतकिमैंनहींसमझा
तिरीनज़रनेकहाथाकिदिलरुबाहूँमैं
  - Mahboob Khizan
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