ham aap qayamat se guzar kyun nahin jaate | हम आप क़यामत से गुज़र क्यूँँ नहीं जाते

  - Mahboob Khizan
हमआपक़यामतसेगुज़रक्यूँँनहींजाते
जीनेकीशिकायतहैतोमरक्यूँँनहींजाते
कतरातेहैंबलखातेहैंघबरातेहैंक्यूँँलोग
सर्दीहैतोपानीमेंउतरक्यूँँनहींजाते
आँखोंमेंनमकहैतोनज़रक्यूँँनहींआता
पलकोंपेगुहरहैंतोबिखरक्यूँँनहींजाते
अख़बारमेंरोज़ानावहीशोरहैयानी
अपनेसेयेहालातसँवरक्यूँँनहींजाते
येबातअभीमुझकोभीमालूमनहींहै
पत्थरइधरआतेहैंउधरक्यूँँनहींजाते
तेरीहीतरहअबयेतिरेहिज्रकेदिनभी
जातेनज़रआतेहैंमगरक्यूँँनहींजाते
अबयादकभीआएतोआईनेसेपूछो
'महबूब-ख़िज़ाँ'शामकोघरक्यूँँनहींजाते
  - Mahboob Khizan
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