ye jo ham kabhi kabhi sochte hain raat ko | ये जो हम कभी कभी सोचते हैं रात को

  - Mahboob Khizan
येजोहमकभीकभीसोचतेहैंरातको
रातक्यासमझसकेइनमुआमलातको
हुस्नऔरनजातमेंफ़स्ल-ए-मश्रिक़ैनहै
कौनचाहतानहींहुस्नकोनजातको
येसुकून-ए-बे-जिहतयेकशिशअजीबहै
तुझमेंबंदकरदियाकिसनेशश-जहातको
साहिल-ए-ख़यालपरकहकशाँकीछूटथी
एकमौजलेगईइनतजल्लियातको
आँखजबउठेभरआएशे'रअबकहाजाए
कैसेभूलजाएवोभूलनेकीबातको
देखमिरीनिगाहतूभीहैजहाँभीहै
किसनेबा-ख़बरकियादूसरेकीज़ातको
क्यामिरीनिगाहतूभीहैजहाँभीहै
किसनेबा-ख़बरकहादूसरेकीज़ातको
क्याहुईंरिवायतेंअबहैंक्यूँँशिकायतें
इशक़-ए-ना-मुरादसेहुस्न-ए-बे-सबातको
बहार-ए-सर-गिराँतूख़िज़ाँ-नसीबहै
औरहमतरसगएतेरेइल्तिफ़ातको
  - Mahboob Khizan
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