kya sitam hai ki sitam ham pe vo kar jaate hain | क्या सितम है कि सितम हम पे वो कर जाते हैं

  - Mahboob Khan Raunaq
क्यासितमहैकिसितमहमपेवोकरजातेहैं
अपनेसाएसेजोतन्हाईमेंडरजातेहैं
लौटकेआनाहीपड़ताहैउन्हेंसैंकड़ोंबार
तेरेकूचेसेजोइकबारगुज़रजातेहैं
ग़मकेमारोंकोभीआतीहैकभीख़ुदपेहँसी
कभीसहरामेंभीकुछफूलबिखरजातेहैं
यादरहजातेहैंअहबाबकेकुछलुत्फ़-ओ-करम
दिनमुसीबतकेबहर-हालगुज़रजातेहैं
पारसाईजताओकियेहैमय-ख़ाना
अच्छेअच्छेयहाँशीशेमेंउतरजातेहैं
तुमपशेमाँहोंतुमपरकोईइल्ज़ामनहीं
मरनेवालेकभीबे-मौतभीमरजातेहैं
मेरीबिगड़ीहुईतक़दीरबनेयाबने
उनकेबिखरेहुएगेसूतोसँवरजातेहैं
दफ़्नहोकरभीकहींदबतेहैंअरमानहसीं
बनकेगुलसीना-ए-गुलशनपेउभरजातेहैं
जानदेदेतेहैंजोबातकेहोतेहैंधनी
औरहोंगेजोज़बाँदेकेमुकरजातेहैं
लेकेउम्मीदयहाँआएथेक्याक्या'रौनक़'
आपकीबज़्मसेक्यालेकेअसरजातेहैं
  - Mahboob Khan Raunaq
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