da'wa hai aazmaaie chahe jahaan mujhe | दा'वा है आज़माईए चाहे जहाँ मुझे

  - Mahboob Khan Raunaq
दा'वाहैआज़माईएचाहेजहाँमुझे
हूँबा-वफ़ाक़ुबूलहैहरइम्तिहाँमुझे
फ़र्सूदाअहल-ए-इश्क़केअफ़्सानेहोगए
लिखनीहैतर्ज़-ए-नौसेमिरीदास्ताँमुझे
ज़ाहिदनेज़िक्र-ए-ख़ुल्दमेंकीथीनिशाँ-दही
मालूममै-कदाथाकू-ए-बुताँमुझे
हररहगुज़रपेछोड़ेहैंकुछऐसेनक़्श-ए-पा
किढूँढतारहेगाहरइककारवाँमुझे
उसमंज़िल-ए-हयातमेंहैअबजुनूँमिरा
ख़्वाहिशहैसूदकीतोख़ौफ़-ए-ज़ियाँमुझे
उनकीजफ़ापेकोईउन्हेंटोकतानहीं
तल्क़ीन-ए-सब्रकरताहैसाराजहाँमुझे
'रौनक़'ज़मानाकुछभीकहेइसकाग़मनहीं
वोबद-गुमाँहैंमुझसेनहींयेगुमाँमुझे
  - Mahboob Khan Raunaq
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