ab kahaan pyaar vyaar bastii men | अब कहाँ प्यार व्यार बस्ती में

  - lokesh kumar
अबकहाँप्यारव्यारबस्तीमें
दिलहुआसोगवारबस्तीमें
आदमीभरगयाअनासेअब
पड़गईहैदरारबस्तीमें
खेलताथाकभीजहाँबचपन
हैवहाँअबदिवारबस्तीमें
ज़िन्दगीजबभीदर्ददेतीहै
होताहूँमैंशिकारबस्तीमें
ज़ुल्महोतेतोसबनेदेखाथा
क्यालगातागुहारबस्तीमें
मुफ़्लिसीछायीतोमुझेसबने
करदियादरकिनारबस्तीमें
लुटनेवालेहाएअपनेथे
अबहूँबे-गमगुसारबस्तीमें
आँखेंभरआईक्यूँँ"तरब"तेरी
क्यूँँहुआबेक़रारबस्तीमें
  - lokesh kumar
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